Monday, 19 October 2015

यौन कमजोरी का आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic Treatment Sexual Weakness)

परेशान आज का युवा खान-पान और मिलावटी सामान के सेवन से नपुंसकता (Impotence ) जैसी घातक बीमारियों से जूझ रहा है आये दिन हमें कई लोगो के इसकी जानकारी के लिए प्रश्न आते है इस प्रकार के नवजवानों के लिए आयुर्वेद द्वारा एक विशेष चूर्ण का निर्मार्ण करके आप लाभ ले सकते है एक बार इस्तेमाल करके इस दिव्य चूर्ण का लाभ अवस्य उठाये - बस आप इसे घर पे सारी सामग्री लाके निर्माण करे - बाजार में हो सकता है आपको सही प्राप्त न हो सके और फिर आपका विश्वास आयुर्वेद से न उठ जाए -





कैसे बनाये (How to make it ):-



कोंच के बीज शुद्ध- 50 ग्राम

असगंध- 50 ग्राम


विदारीकन्द- 50 ग्राम


मूसली- 50 ग्राम


मोचरस- 50 ग्राम


गोखरू- 50 ग्राम


जायफल- 50 ग्राम


उडद की दाल- 50 ग्राम (घी में भुनी हुई )


बंशलोचन- 50 ग्राम


सेमर के फूल- 50 ग्राम


खरेंटी- 50 ग्राम


सतावर- 50 ग्राम


भांग- 50 ग्राम ( पानी से धुली और फिर सुखाई हुई )


मिश्री- 700 ग्राम



आप बाजार में आयुर्वेद पंसारी से लाई गई उपरोक्त सभी उपरोक्त सामान  को कूटकर छान ले ओर आपस में मिक्स करके कांच के बर्तन में ढक्कन लगाकर रख ले -

मात्रा और अनुपान (Volume and dose ):-



आप इसे प्रातः और रात्री में सोने से एक घंटा पहले 3-6 ग्राम पानी से या गाय के दूध से ले-

गुण ओर उपयोग (Properties and use ):-


आपके शरीर के लिए यह चूर्ण पोष्टिक रसायन है इसके सेवन से बल ओर वीर्य की वृद्धि होती है- अत्यधिक स्त्री प्रसंग या किशोरावस्था में अप्राकृतिक ढंग से वीर्य का ज्यादा दुरूपयोग करने से वीर्य  पतला हो जाता है तथा शुक्रवाहिनी शिराएं भी कमजोर हो जाती है ओर फिर वे वीर्य धारण करने में सफल नहीं हो पाती है - जिसके परिणाम स्वरूप स्वप्नदोष-शीघ्रपतन-वीर्य का पतला पन-पेशाब के साथ ही वीर्य निकल जाना आदि विकार उत्पन्न हो जाते है इन विकारों को दूर करने के लिए आप इस चूर्ण का उपयोग करना आपके लिए हितकर है-

निम्नांकित फायदे होते हैं:-


यह रसायन के गुण से युक्त है आपकी धातु की रक्षा करता है वीर्य (Semen ) की वृधि करके आपको सामर्थवान बनाने में सक्षम है ये शरीर की पुष्टता बढाता है एक बाजीकरण योग है स्त्री सम्भोग के लिए वीर्य के उत्पादन को बढाता है इसलिए कमजोर व्यक्ति को एक बार अवस्य ही इसका प्रयोग करके इसके गुणों को जांचना और परखना चाहिए क्युकी ये किसी वरदान से कम नहीं है -

डायबिटीज (Diabetes ) के रोगियों के लिये यह चूर्ण किसी वरदान से कम नही है तथा  डायबिटीज के रोगियों की सम्भोग अथवा मैथुन (Sexual intercourse ) करने की क्षमता कमजोर हो जाती है तो आप  इस चूर्ण के सेवन करने से डायबिटीज के रोगियों को दो तरफा फायदा होता है  इससे प्रमेह (Gonorrhea ) की शिकायत भी दूर होती है-

जिनका वीर्य (semen )  हस्त मैथुन (Masturbation ) या अन्य अप्राकृतिक तरीके अपनाने के बाद पानी जैसा पतला हो गया हो , इस चूर्ण के सेवन करने से वीर्य शुद्ध  होकर गाढ़ा और प्राकृतिक हो जाता है-

जिनके वीर्य  में कोई भी विकृति हो , शुक्राणु  कम हों या स्पेर्म न बन रहे हों , उन्हें इस औशधि का उपयोग जरूर करना चाहिये-

इस चूर्ण  को सभी प्रकार के शुक्र दोषों (dyspermatism ) में उपयोग किया जा सकता है-

शरीर की साधारण स्वास्थ्य सुरक्षित रखने और शक्ति संचार को स्थाई बनाये रखने के लिये तथा कु-पोषणसे पीड़ित रोगियों के लिये यह एक लाभकारी औषधि है-

नोट :-आप के लिए पूरे जाड़े में सेवन करने के लिए उपयुक्त चूर्ण है ..! गर्मी में इसकी मात्रा आधी ले और दूध आधा लीटर गाय का हो तो उत्तम है -

Wednesday, 14 October 2015

बथुआ का औषधीय प्रयोग-बथुआ के गुण-बथुआ का परिचय तथा औषधीय लाभ

बथुआ हरा शाक है जो नाइट्रोजन युक्त मिट्टी में फलता-फूलता है। हर घर में खाया जाने वाला आम साग है जिसे आप इसके बिना स्‍वास्‍थ्‍य लाभ जाने ही खा लेते हैं। बथुआ का या तो साग बनता है और या फिर रायता। इसमें बहुत सा विटामिन ए, कैल्‍शियम, फॉस्‍फोरस और पोटैशियम होता है। बथुआ हरा शाक है जो नाइट्रोजन युक्त मिट्टी में फलता-फूलता है। सदियों से इसका उपयोग कई बीमारियों को दूर करने में होता है
इसे लिमिट में खाना चाहिये क्‍योंकि इसमें ऑक्‍जेलिक एसिड का लेवल बहुत हाई होता है। इसे ज्‍यादा खाने से डायरिया भी हो सकता है। इसके अलावा आयुर्वेद में प्रेगनेंट औरतों को यह सलाह दी गई है कि वे बथुए का सेवन ना करें नहीं तो मिसकैरेज होने की संभावना रहती है।

यह बडे़ और बच्‍चों सभी के लिये बहुत ही फायदेमंद है क्‍योंकि इसे खाने से कई तरह की बीमारी में लाभ होता है। चाहे अनियमित पीरियड्स हों, कब्‍ज , मौखिक स्‍वास्‍थ्‍य या फिर बालों को सेहतमंद बनाना हो।


बथुआ का औषधीय प्रयोग-बथुआ के गुण



बालों को बनाए सेहतमंद:-
बालों का ओरिजनल कलर बनाए रखने में बथुआ आंवले से कम गुणकारी नहीं है। सच पूछिए तो इसमें विटामिन और खनिज तत्वों की मात्रा आंवले से ज्यादा होती है। इसमें आयरन, फास्फोरस और विटामिन ए व डी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।


दांतों की समस्या में असरदार:-
बथुए की पत्तियों को कच्चा चबाने से मुंह का अल्सर, #श्वास की दुर्गध, #पायरिया और दांतों से जुड़ी अन्य समस्याओं में बड़ा फायदा होता है।


कब्ज को करे दूर:-
कब्ज से राहत दिलाने में बथुआ बेहद कारगर है। गठिया, लकवा, गैस की समस्या आदि में भी यह अत्यंत लाभप्रद है।


बढ़ाता है पाचन शक्ति:-
भूख में कमी आना, भोजन देर से पचना, खट्टी डकार आना, पेट फूलना जैसी मुश्किलें दूर करने के लिए लगातार कुछ सप्ताह तक बथुआ खाना काफी फायदेमंद रहता है।


बवासीर की समस्या से दिलाए निजात:-
सुबह शाम बथुआ खाने से बवासीर में काफी लाभ मिलता है। तिल्ली [प्लीहा] बढ़ने पर काली मिर्च और सेंधा नमक के साथ उबला हुआ बथुआ लें। धीरे-धीरे तिल्ली घट जाएगी।


नष्ट करता है पेट के कीड़े:-
बच्चों को कुछ दिनों तक लगातार बथुआ खिलाया जाए तो उनके पेट के कीड़े मर जाते हैं


पीलिया में फायदेमंद :-
पीलिया में बथुआ और गिलोय का रस ले कर एक सीमित मात्रा में दोनों को मिलाएं, फिर इस मिश्रण का 25-30 ग्राम रोज़ दिन में दो बार लें।

प्रसव -संक्रमण :-
प्रसव के बाद संक्रमण को ठीक करता है आप 10 ग्राम बथुआ, अजवाइन, मेथी और गुड ल कर मिला लीजिये। इसे 10 से 15 दिन तक लगातार खाइये, लाभ मिलेगा।

पेशाब -संक्रमण:-
जिन लोगो के पेशाब में संक्रमण हो या जलन हो या पेशाब रुक-रुक के आता है वो 10 ग्राम बथुए कि पत्‍ती का रस ले कर उसमें 50 एमएल पानी मिलाएं। इस मिश्रण को मिश्री के साथ हर रोज लें।


खून साफ़ करता है :-
खून को साफ़ करने के लिए आप बथुए को 4-5 नीम की पत्‍तियों के रस के साथ खाए तो खून अंदर से शुद्ध हो जाता है।


अनियमित माहवारी :-
बथुआ का बीज और सोंठ मिला कर पाउडर बनाइये। फिर 400 ग्राम लीटर पानी में 15-20 ग्राम पाउडर मिला कर उस पानी को उबाल कर 100 ग्राम कर लीजिये। फिर इसे छानिये और दिन में दो बार लीजिये।





  • कच्चे बथुआ के एक कप रस में थोड़ा सा नमक मिलाकर प्रतिदिन लेने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
  • गुर्दा, मूत्राशय और पेशाब के रोगों में बथुआ का रस पीने से काफी लाभ मिलता है।
  • बथुआ को उबाल कर इसके रस में नींबू, नमक और जीरा मिलाकर पीने से पेशाब में जलन और दर्द नहीं होता।
  • सिर में अगर जुएं हों तो बथुआ को उबालकर इसके पानी से सिर धोएं।  जुएं मर जाएंगे और सिर भी साफ हो जाएगा।
  • सफेद दाग, दाद, खुजली फोड़े और चर्म रोगों में बथुआ को प्रतिदिन उबालकर इसका रस पीना चाहिए।
  • बथुआ का रस मलेरिया, बुखार और कालाजार संक्रामक रोगों में भी फायदेमंद होता है।
  • कब्ज के रोगियों को तो इसका नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। कुछ हफ्तों तक नियमित रूप से खाने से कब्ज की समस्या समाप्त हो जाती है।
  • बथुआ को साग के तौर पर खाना पसंद न हो तो इसका रायता बनाकर खाएं।
  • पथरी होने पर एक गिलास कच्चे बथुआ के रस में शक्कर को मिलाकर रोज पिएं। पथरी टूटकर बाहर निकल आएगी।

अजवायन के लाभ-अजवायन के गुण-अजवायन का औषिध के रूप में उपयोग (The benefits of parsley)

अजवायन एक ऐसी चीज या औषधि है,जो अकेली ही एक ऐसी जो कि सौ प्रकार के खाद्य पदार्थों को पचाने वाली होती है।

अनेक प्रकार के गुणों से भरपूर अजवायन पाचक रूचि कारक,तीक्ष्ण, कढवी, अग्नि प्रदीप्त करने वाली, पित्तकारक तथा शूल, वात, कफ, उदर आनाह, प्लीहा, तथा क्रमि इनका नाश करने वाली होती है।

अति गर्म प्रकृति वालों के लिए यह हानिकारक होती है। इसकी खेती सारे देश में होती है।

अजवायन का उपयोग औषिध के रूप में, मुख्यत: उदर एवं पाचन से समबन्धित विकारों तथा वात व्याधियों को दूर करने में बहुत गुणकारी होती है।

अजवायन में लाल मिर्च की तेजी, राई की कटुता तथा हींग और लहसुन की वातनाशक गुण एक साथ मिलते हें। इस लिए यह गुणों का भंङार है । इसी लिए यह उदर शूल, गैस, वायुशोला, पेट फूलना, वात प्रकोप आदि को दूर करता है। इसी कारण इसे घर पर छुपा हुआ वेद्य कहा गया हे।

अजवायन की पत्ती का दिलकश स्वाद होता है । इसी कारण इसका ( पत्ती) इतालवी व्यंजनों में,जेसे पिज्जा पास्ता आदि। अजवायन की पत्ती में एंटी बैक्टीरियल गुण है जो कि संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। अजवायन की ताजा पत्ती में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व और विटामिन है. विटामिन सी, विटामिन ए, लोहा, मैंगनीज और कैल्शियम और साथ ही युक्त ओमेगा -3 फैटी एसिड का एक अच्छा स्रोत है। अजवायन से कैलशियम, फासफोरस, लोहा सोडियम व पोटेशियम जैसे तत्व मिलते हैं।

अजवायन के लाभ-अजवायन के गुण-अजवायन का औषिध के रूप में उपयोग (The benefits of parsley)

  • यह एक उत्कृष्ट एंटीऑक्सिडेंट है, अजवायन मोटापे को कम करने में भी मदद करती है। सर्दियों के मौसम में सर्द से बचने के लिए अजवायन एक सफल औषधि है। जंगली अजवायन की पत्ती का तेल श्रेष्ट माना गया है प्रतिरक्षा प्रणाली को दृढ़ करता है,श्वसन किर्या को दरुस्त करता है जोड़ों और मांसपेशियों का लचीलापन बढाता है और त्वचा को संक्रमण से बचाता है-
  • बरसात के मौसम में पाचन क्रिया के शिथिल पड़ने पर अजवायन का सेवन काफी लाभदायक होता है। इससे अपच को दूर किया जा सकता है।
  • अजवायन, काला नमक, सौंठ तीनों को पीसकर चूर्ण बना लें। भोजन के बाद फाँकने पर अजीर्ण, अशुद्ध वायु का बनना व ऊपर चढ़ना बंद हो जाएगा।
  • खीरे के रस में अजवायन पीसकर चेहरे की झाइयों पर लगाने से लाभ होता है।
  • अधिक शराब पी लेने से अगर व्‍यक्ति को उल्‍टियां आ रहीं हो तो उसे अजवाईन खिलाना बेहतर होगा। इससे उसको आराम मिलेगा और भूंख भी अच्‍छी तरह से लगेगी।
  • गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अजवाइन जरुर खानी चाहिए क्‍योंकि इससे ना सिर्फ खून साफ रहता है बल्कि यह पूरे शरीर में रक्त के प्रवाह को संचालित भी करता है।
  • कान में दर्द होने पर अजवाइन के तेल की कुछ बूंदे कान में डालने से आराम मिलता है-
  • शरीर में दाने हो जाएं या फिर दाद-खा़ज हो जाए तो, अजवाइन को पानी में गाढ़ा पीसकर दिन में दो बार लेप करने से फायदा होता है। घाव और जले हुए स्थानों पर भी इस लेप को लगाने से आराम मिलता है और निशान भी दूर हो जाते हैं।
  • गठिया के रोगी को अजवाइन के चूर्ण की पोटली बनाकर सेंकने से रोगी को दर्द में आराम पहुंचता है। अजवाइन का रस आधा कप में पानी मिलाकर आधा चम्मच पिसी सोंठ लेकर ऊपर से इसे पीलें। इससे गठिया का रोग ठीक हो जाता है।
  • अजवाइन के रस में एक चुटकी कालानमक मिलाकर सेवन करें। और ऊपर से गर्म पानी पी लें। इससे खांसी बंद हो जाती है।
  • गुड़ और पिसी हुई कच्ची अजवाइन समान मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच रोजाना 4 बार खायें। इससे गुर्दे का दर्द भी ठीक हो जाता है।
  • जिन बच्चे को रात में पेशाब करने की आदत होती है उन्हें रात में लगभग आधा ग्राम अजवाइन खिलायें।
  • 2 चम्मच अजवाइन को 4 चम्मच दही में पीसकर रात में सोते समय पूरे चेहरे पर मलकर लगाएं और सुबह गर्म पानी से साफ कर लें।
  • अजवाइन को भून व पीसकर मंजन बना लें। इससे मंजन करने से मसूढ़ों के रोग मिट जाते हैं।
  • अजवाइन, सेंधानमक, सेंचर नमक, यवाक्षार, हींग और सूखे आंवले का चूर्ण आदि को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 1 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम शहद के साथ चाटने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।
  • जुकाम के साथ हल्का बुखार ....देशी अजवाइन 5 ग्राम, सतगिलोए 1 ग्राम को रात में 150 मिलीलीटर पानी में भिगोकर, सुबह मसल-छान लें। फिर इसमें नमक मिलाकर दिन में 3 बार पिलाने से लाभ मिलता है।
  • अजवाइन का रस आधा कप इसमें इतना ही पानी मिलाकर दोनों समय (सुबह और शाम) भोजन के बाद लेने से दमा का रोग नष्ट हो जाता है।
  • मासिक धर्म के समय पीड़ा होती हो तो 15 से 30 दिनों तक भोजन के बाद या बीच में गुनगुने पानी के साथ अजवायन लेने से दर्द मिट जाता है। मासिक अधिक आता हो, गर्मी अधिक हो तो यह प्रयोग न करें। सुबह खाली पेट 2-4 गिलास पानी पीने से अनियमित मासिक स्राव में लाभ होता है।
  • एसिडिटी की तकलीफ है तो थोड़ा-थोड़ा अजवाइन और जीरा को एक साथ भून लें। फिर इसे पानी में उबाल कर छान लें। इस छने हुए पानी में चीनी मिलाकर पिएं, एसिडिटी से राहत मिलेगी।
  • इसे अदरक(सोंठ) पाउडर और काला नमक 2-2 और 1 के अनुपात में मिलाएं भोजन करने के बाद एक चम्मच चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें तो पेट दर्द व गैस की समस्या में आराम मिलेगा। अशुद्ध वायु का बनना व सर में चढ़ना ख़त्म होगा।
  • अजवायन पाउडर का एक चम्मच (टी स्पून) ले उसमे एक चुटकी काला नमक मिला कर दिन में दो या तीन बार गुनगुने पानी के साथ सेवन से पेट में दर्द, दस्त , अपच, अजीर्ण, अफारा तथा मन्दाग्नि में लाभकारी होती है।
  • अजवायन, सौंफ, सोंठ और काला नमक को बराबर मात्रा में मिलाकर देसी घी के साथ दिन में तीन बार खाएं। भूख लगने लगेगी ।
  • शाम को अजवायन को एक गिलास पानी में भिगोएं सुबह छानकर उस पानी में शहद डालकर पीने से मोटापे को कम करने में मदद होती है।
  • अजवायन के तेल की कुछ बूंदें गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मसूड़ों की सूजन कम होती है।
  • खांसी जुकाम में चुटकी भर काला नमक, आधा चम्मच अजवायन,और दो लांग इन सब को पिस कर गुनगुने पानी के साथ दिन में कई बार पीने से अदभुत लाभ मिलता है ।यह रामबाण दवा है।
  • आधा कप पानी में आधा चम्मच अजवायन और थोड़ी सी हल्दी पाउडर डालकर उबाले और ठंडा करें और इसमें एक चम्मच शहद डालकर पीएं। और गर्म पानी में अजवायन डालकर इसका भाप लें। इस से छाती में जमा कफ निकल जाता है ।
  • शीत-पित्ती की बीमारी के लिए अजवायन के फूल को गुड के साथ मिला कर पानी से लेने से पित्ती ठीक होती है। अजवायन का चूर्ण गेरु में मिलाकर शरीर पर मलने से पित्ती में तुरन्त लाभ होता है।
  • बेर के पत्तों और अजवायन को पानी में उबालकर, छानकर उस पानी से गरारे करने पर खांसी में लाभ होता है।
  • अजवायन को पानी में डालकर उबालें। छानकर बार बार थोड़ा-थोड़ा लेते रहने से आधे सिर दर्द में लाभ होता है। रात को कई बार पेशाब आने पर भी इसके सेवन से फायदा होता है।
  • जोड़ों के दर्द में सरसों के तेल में अजवायन डालकर अच्छे से गर्म करें व छान ले और इससे जोड़ों की मालिश करे इससे आराम होगा।
  • अजवायन प्रबल कीटनाशक है। आँतों में कीड़े होने पर अजवायन के साथ काले नमक का सेवन करने पर पेट के कीड़े बाहर निकल जाते हैं।अजवायन का चूर्ण और गुड समान मात्रा में मिलकर गोली बनाकर दिन में दो तीन बार खिलाने से पेट के सभी प्रकार के कीडे नष्ट हो जाते है।
  • एक से दो ग्राम ग्राम अजवायन का चूर्ण छाछ के साथ देने से पेट के कीडे नष्ट होकर मल के साथ बाहर निकल जाते है।
  • सुबह दस-पन्द्रह ग्राम गुड खाकर दस-पन्द्रह मिनट बाद एक से दो ग्राम अजवायन का चुर्ण बासी पानी के साथ ले। इससे आंतों में मौजूद सब प्रकार के कीडे मर कर मल के साथ बहार निकल जायेंगे।
  • अजवायन को रात में चबाकर गरम पानी पीने से सवेरे पेट साफ हो जाता है।
  • अजवायन के फूल को शहद में मिलाकर लेने से खॉसी और कफ में फायदेमंद होता है इससे कफ की दुर्गन्ध भी खत्म होती है।
  • चोट लगने पर अजवायन एवं हल्दी की पुल्टिस बाँधने से चोट की सूजन व दर्द कम होती है।
  • अजवायन का अर्क या तेल 10-15 बूँद बराबर लेते रहने से दस्त बंद होते हैं।
  • अजवायन का चूर्ण दो-दो ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार लेने से ठंड का बुखार शान्त होता है।
  • ब्लडप्रेशर, बाय का दर्द, रक्तचाप और चर्म रोगों, में ऊँगलियों के काम न करने पर अजवायन के फूल,एवं गिलोय का अर्क 1-1 ग्राम साथ मिलाकर लेना लाभ दायक होता है।
  • अजवायन के फूल (सफ़ेद दाने के रूप में बाज़ार में उपलब्ध) का चूर्ण पानी में मिलाकर उस घोल से घाव, दाद, खुजली, फुंसियाँ आदि धोने पर ये चर्मरोग नष्ट होते हैं।
  • अजवायन का प्रसव के बाद अग्नि की प्रदिप्त करने और भोजन को पचाने, वायु एवं गर्भाशय को शुद्ध करने के लिए सभी परम्परागत भारतीय परिवारों में लड्डू बना कर खिलाया जाने की परंपरा हे।यह चमत्कारी लाभ देता हे। । प्रसूति स्त्रियों को अजवायन व गुड मिलाकर देने से भूख बढ़ती है। प्रसव के बाद अजवायन के प्रयोग से गर्भाशय शुद्ध होता है। गर्भाशय पूर्वास्थिती में आ जाता है। दूध ज्यादा बनता है। बुखार व कमर का दर्द ठीक करता है। इससे खराब मासिक चक्र ठीक भी हो जाता हें।
  • अजवायन 10 ग्राम, छोटी हरड़ का चूर्ण 6 ग्राम, सेंधा नमक 3 ग्राम, हींग 3 ग्राम का चूर्ण बनाकर रखें और 3-3 ग्राम की मात्रा में जल के साथ लें तो पेट दर्द, जलन, अफारा , और मलमूत्र की रूकावट दूर होती है।
  • अजवायन चूर्ण गरम पानी के साथ लेने से या अर्क को गुनगुना करके पीने से या इसके तेल की मालिश करने से बदन दर्द ठीक होता है।
  • अजवायन की पत्ती माहवारी के विकारों के उपचार, फेफड़ों की समस्याओं और अजीर्ण में और प्रयोग किया जाता है यह शक्तिशाली एंटीबायोटिक और एंटीऑक्सिडेंट भी होता है। अजवायन की पत्ती में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक तत्व हंड यह संक्रमण को दूर रखने के महत्वपूर्ण होता है।
  • किडनी या गुर्दे संबंधी परेशानी में एक बड़ा चम्मच जीरा और दो चम्मच अजावयन को पीस कर पाउडर बना लें। इसमें थोड़ा सा काला नमक और एक चम्मच भूरे रंग का सिरका डाले। हर घंटे बाद एक एक चम्मच इस मिश्रण का लें। दर्द से जल्द ही आराम मिल जाएगा।
  • दोपहर को भोजन के बाद पिसी 2 - 3 ग्राम अजवायन लेने से खाना आसानी से हजम होता है।
  • पान में अजवायन को डाल कर खाने से पुरानी खांसी ठीक होती है।
  • अजवायन को सरसों के तेल में डाल कर पकायें उससे बच्चों को मालिश करें सर्दीजुकाम में तथा प्रसव उपरांत लाभ होगा।
  • मसूड़ों में सूजन होने पर अजवायन के तेल की कुछ बूँदें पानी में मिलाकर कुल्ला करने से सूजन कम होती है।
  • आधे सिर में दर्द होने पर एक चम्मच अजवायन आधा लीटर पानी में डालकर उबालें। पानी को छानकर रखें एवं दिन में दो-तीन बार थोड़ा-थोड़ा लेते रहने से काफी लाभ होगा।
  • सरसों के तेल में अजवायन डालकर अच्छी तरह गरम करें। इससे जोड़ों की मालिश करने पर जोड़ों के दर्द में आराम होता है।
  • चोट लगने पर नीले-लाल दाग पड़ने पर अजवायन एवं हल्दी की पुल्टिस चोट पर बाँधने पर दर्द व सूजन कम होती है।
  • मुख से दुर्गंध आने पर थोड़ी सी अजवायन को पानी में उबालकर रख लें, फिर इस पानी से दिन में दो-तीन बार कुल्ला करने पर दो-तीन दिन में दुर्गंध खत्म हो जाती है।

गुणकारी खजूर-खजूर के गुण (Nature Has Given You a Healthy Palm or Date)

प्रकृति ने मनुष्य को यूं तो बहुत कुछ दिया है पर हम प्रकृति की दी हुई इस अनमोल सम्पदा को ठीक प्रकार से उपयोग करना नहीं जानते।
सर्दियों की मेवा के रूप में प्रकृति ने हमें बहुत सी चीजें दी हैं, जिनमें खजूर की मिठास का भी प्रमुख स्थान रहा है। यह दिल, दिमाग, कमर दर्द तथा आंखों की कमजोरी के लिए बहुत गुणकारी है। खजूर खाने से शरीर की आवश्यक धातुओं को बल मिलता है। यह छाती में एकत्रित कफ को निकालता है।

खजूर में 60 से 70 प्रतिशत तक शर्करा होती है, जो गन्ने की चीनी की अपेक्षा बहुत पौष्टिक व गुणकारी वस्तु है। खाने में तो खजूर बहुत स्वादिष्ट होती ही है, सेहत की दृष्टि से भी यह बहुत गुणकारी है। इसके अलावा विभिन्न बीमारियों में भी खजूर का सेवन बहुत लाभ पहुंचाता है |


खजूर के गुण 

  • खजूर 200 ग्राम, चिलगोजा गिरी 60 ग्राम, बादाम गिरी 60 ग्राम, काले चनों का चूर्ण 240 ग्राम, गाय का घी 500 ग्राम, दूध दो लीटर और चीनी या गुड़ 500 ग्राम। इन सबका पाक बनाकर 50 ग्राम प्रतिदिन गाय के दूध के साथ खाने से हर प्रकार की शारीरिक वं मानसिक कमजोरी दूर होती है।


  • छुहारे खाने से पेशाब का रोग दूर होता है। बुढ़ापे में पेशाब बार-बार आता हो तो दिन में दो छुहारे खाने से लाभ होगा। छुहारे वाला दूध भी लाभकारी है। यदि बच्चा बिस्तर पर पेशाब करता हो तो उसे भी रात को छुहारे वाला दूध पिलाएं। यह मसानों को शक्ति पहुंचाते हैं।


  • छुहारे खाने से मासिक धर्म खुलकर आता है और कमर दर्द में भी लाभ होता है।


  • खजूर मधुर, शीतल, पौष्टिक व सेवन करने के बाद तुरंत शक्ति-स्फूर्ति देने वाला है। यह रक्त, मांस व वीर्य की वृद्धि करता है। हृदय व मस्तिष्क को शक्ति देता है। वात-पित्त व कफ इन तीनों दोषों का शामक है। यह मल व मूत्र को साफ लाता है। खजूर में कार्बोहाईड्रेटस, प्रोटीन्स, कैल्शियम, पौटैशियम, लौह, मैग्नेशियम, फास्फोरस आदि प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं।

  • रात को खजूर भिगोकर सुबह दूध या घी के साथ खाने से मस्तिष्क व हृदय की पेशियों को ताकत मिलती है। विशेषतः रक्त की कमी के कारण होने वाली हृदय की धड़कन व एकाग्रता की कमी में यह प्रयोग लाभदायी है।


  • रात को भिगोकर सुबह दूध के साथ लेने से पेट साफ हो जाता है।


  • खजूर में शर्करा, वसा (फैट) व प्रोटीन्स विपुल मात्रा में पाये जाते हैं। इसके नियमित सेवन से मांस की वृद्धि होकर शरीर पुष्ट हो जाता है।


  • रक्त को बढ़ाकर त्वचा में निखार लाता है।


  • खजूर उत्तम वीर्यवर्धक है। गाय के घी अथवा बकरी के दूध के साथ लेने से शुक्राणुओं की वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त अधिक मासिक स्राव, क्षयरोग, खाँसी, भ्रम(चक्कर), कमर व हाथ पैरों का दर्द एवं सुन्नता तथा थायराइड संबंधी रोगों में भी यह लाभदायी है।


  • किसी को नशा करने से शरीर में हानि  हो गयी है -नशे का जहर शरीर मै है-हॉस्पिटल मै भर्ती होने की नौबत आ रही हो तो ऐसे लोग भी खजूर के द्वारा जहर कों भगा कर स्वास्थ्य पा सकते है 5 से 7 खजूर अच्छी तरह धोकर रात को भिगोकर सुबह खायें। बच्चों के लिए 2-4 खजूर पर्याप्त हैं। दूध या घी में मिलाकर खाना विशेष लाभदायी है।



  • अति लाभकारी है खजूर-शीतकाल में खजूर सबसे अधिक लोकप्रिय मेवा माना जाता है। घर घर में प्रयोग किया जाने वाला यह खाद्य फल है, जिसे अमीरगरीब ब़डे चाव से खाते हैं। खजूर रेगिस्तानी सूखे प्रदेश का फल है। प्रकृति की यह अनुपम देन खास ऐसे प्रदेशों के लिए ही है, जहां जिन्दगी ब़डी कठिन होती है और जहां बरसात या पीने के पानी की कमी होती है। इसके प़ेड हमें जीवन से ल़डना सिखाते हैं, इसीलिए इसके खाने का प्रचलन ज्यादातर सूखे रेगिस्तानी इलाकों में ही होता है। सूखे खजूर को छुहारा या खारकी कहते हैं। पिंड खजूर भी इसका दूसरा नाम है।


  • खजूर ताजा व सूखे को ही खाया जाता है। अरब प्रदेशों में आम की तरह खजूर भी रस भरे होते हैं, पर वे हाथ लगाते ही कुम्हला जाते हैं। सूखे किस्म की खजूर को पूरा सुखाया जाता है। इसके टुक़डों को मुखवास व खटाई में पचाकर तथा साग बनाकर भी खाया जाता है। अरब लोगों के लिए खजूर लोकप्रिय खाद्य पदार्थ है और वे रोज इसे थ़ोडा बहुत खाते ही हैं।

  • खाने के अलावा अन्य मिष्ठान्न व बेकरी में भी इसका उपयोग किया जाता है। इसका मुरब्बा, अचार व साग भी बनता है। खजूर से बना द्रव्य शहद खूब लज्जतदार होता है और यह शहद दस्त, कफ मिटाकर कई शारीरिक प़ीडाआें को दूर करता है। श्वास की बीमारी में इसका शहद अत्यन्त लाभप्रद होता है। इससे पाचन शक्ति ब़ढती है तथा यह ठंडे या शीत गुणधर्म वाला फल माना जाता है।



  • सौ ग्राम खजूर  में 04 ग्राम चर्बी, 12 ग्राम प्रोटीन, 338 ग्राम कार्बोदित पदार्थ, 22 मिली ग्राम कैल्शियम, 38 मिलीग्राम फास्फोरस प्राप्त होती है। विटामिन ए बी सी, प्रोटीन, लौह तत्व, पोटेशियम और सोडियम जैसे तत्व मौजूद रहते हैं। बच्चों से लेकर ब़ूढे, बीमार और स्वस्थ सभी इसे खा सकते है।


  • खजूर खाने के पहले इसे अच्छी तरह से धो लेना चाहिए, क्योंकि प़ेड पर खुले  में पकते हैं तथा बाजार में रेहडी वाले बिना ढके बेचते हैं, जिस पर मक्खी मच्छर बैठने का अंदेशा रहता है। आजकल खजूर छोटी पैकिंगों में भी मिलते हैं। वे दुकानदार स्वयं पोलीथीन में पैक कर अपनी दुकान का नाम लगा देते हैं। वे इतने साफ नहीं होते। वैज्ञानिक ढंग से पैक किए खजूर ही खाने चाहिए।


  • 100 ग्राम से अधिक खजूर  नहीं खाने चाहिए। इससे पाचन शक्ति खराब होने का भय रहता है। अगर कोई बहुत ही दुबला पतला हो, तो खजूर खाकर दूध पीने से उसका वजन भी ब़ढ जाता है। यद्यपि खजूर हर प्रकार से गुणकारक है, परन्तु इसमें विरोधाभास भी पाया जाता है। शीतकाल में जो इसे खाते हैं, वे इसे गरम मानते हैं। आयुर्वेद ग्रंथों में इसे शीतल गुण वाला माना है, इसलिए गरम तासीर वालों को यह खूब उपयोगी व माफिक आता है। ठंडा आहार जिनके शरीर के अनुरूप नहीं होता, उन्हें खजूर नहीं खाना चाहिए।


  • कुछ लोग घी में रखकर उसका पेय बनाकर पीते हैं। ये अति ठंडा होता है। जिन्हें खजूर न पचता हो, उन्हें नहीं खाना चाहिए। यह वायु प्रकोप को मिटाता है, पित्तनाशक है। पित्त वालों को घी के साथ खाने से असरदायक होता है। यह मीठा स्निग्ध होने से थ़ोडे प्रमाण में पित्त करता है, परन्तु ग़ुड, शक्कर, केले व अन्य मिठाइयों से कम पित्त करता है। कफ के रोगी को चने के दलिये (भुने हुए चने) के साथ खाना चाहिए। धनिए के साथ खाने से कफ का नाश होता है।


  • यह औषधि का काम तो करता ही है, व्रण, लौह विकार, मूर्च्छा, नशा च़ढना, क्षय रोग, वार्धक्य, कमजोरी, गरमी वगैरह के साथ कमजोर मस्तिष्क वालों के लिए भी यह दवा का काम करता है। खजूर मांसवर्धक होने के कारण शाकाहारी लोगों की अच्छी खुराक माना जाता है। यह भी माना जाता है कि खजूर को दूध में उबाल कर उस दूध को पीने से नुकसानदायक होता है, इसलिए खजूर खाने व दूध पीने के बीच 23 घंटों का अंतर रखना चाहिए।


  • बच्चों को पूरा खजूर न देकर उसकी गुठली निकाल टुक़डे कर खिलाना चाहिए। खजूर एक तरह से अमृत के समान है। यह आंखों की ज्योति व याददाश्त भी ब़ढाता है। दांतों से लहू निकले या मसूडे खराब हों, तो यह दवा का काम करता है। इसके खाने से बाल कम झ़डते हैं। खजूर व उसका शहद एक तरह से कुदरत की अनुपम देने हैं, इसलिए खूब खाएं व खूब खिलाएं।


  • छुहारे खाकर गर्म दूध पीने से कैलशियम की कमी से होने वाले रोग, जैसे दांतों की कमजोरी, हड्डियों का गलना इत्यादि रूक जाते हैं।

  • कम रक्तचाप वाले रोगी 3-4 खजूर गर्म पानी में धोकर गुठली निकाल दें। इन्हें गाय के गर्म दूध के साथ उबाल लें। उबले हुए दूध को सुबह-शाम पीएं। कुछ ही दिनों में कम रक्तचाप से छुटकारा मिल जायेगा ।

  • सुबह-शाम तीन छुहारे खाकर बाद में गर्म पानी पीने से कब्ज दूर होती है। खजूर का अचार भोजन के साथ खाया जाए तो अजीर्ण रोग नहीं होता तथा मुंह का स्वाद भी ठीक रहता है। खजूर का अचार बनाने की विधि थोड़ी कठिन है, इसलिए बना-बनाया अचार ही ले लेना चाहिए।

  • मधुनेह के रोगी जिनके लिए मिठाई, चीनी इत्यादि वर्जित है, सीमित मात्रा में खजूर का इस्तेमाल कर सकते हैं। खजूर में वह अवगुण नहीं है, जो गन्ने वाली चीनी में पाए जाते हैं।

  • पुराने घावों के लिए खजूर की गुठली को जलाकर भस्म बना लें। घावों पर इस भस्म को लगाने से घाव भर जाते हैं।

  • खजूर की गुठली का सुरमा आंखों में डालने से आंखों के रोग दूर होते हैं।

  • छुहारे को घी में भूनकर दिन में 2-3 बार सेवन करने से खांसी और बलगम में राहत मिलती है।

  • खजूर की गुठली को पानी में घिसकर सिर पर लगाने से सिर की जुएं मर जाती हैं।

                                             खजूर की चटनी


सामग्री :-
200 ग्राम खजूर, 100 ग्राम इमली, 1/2 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर, 1/2 टी स्पून भुना जीरा पाउडर, 1/4 टी स्पून काला नमक, नमक स्वादानुसार।


विधि :-
खजूर के बीच में से गुठली निकाल दें, धोकर इसमें एक कप पानी डाल दें। 2 घंटे के लिए भीगने दें। 5 मिनट के लिए पकाये और ब्लेंडर में बारीक पीस लें। अब इसमें लाल मिर्च पाउडर, जीरा पाउडर और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें, खजूर की चटनी तैयार है।

Monday, 12 October 2015

नवरात्रि उपवास और हेल्थ टिप्स (Navratri Fasting and Health Tips)

 नवरात्र के व्रत में न रहें भूखे ( Should not Hungry in Navratri Fasts):-
नवरात्र के दौरान कमजोरी से बचने के लिए निर्जल उपवास नहीं करना चाहिए, इससे शरीर को फायदा पहुंचने के बजाय नुकसान होता है। नवरात्र के व्रत में पेय पदार्थ अवश्यर लेते रहें या फिर कुछ हल्का -फुल्का भी खाने में ले सकते हैं। यदि आप व्रत के पैक्ड फूड प्रॉडक्ट्स नहीं लेना चाहते तो आप लगातार पानी पीते रहें जिससे शरीर में पानी की कमी न हो। आइए जानें नवरात्र के व्रत में भूखें रहने के क्या नुकसान हो सकते हैं।
 
नवरात्रि उपवास और हेल्थ टिप्स (Navratri Fasting and Health Tips):-
उपवास के दिनों में पूरा दिन हल्का-फुल्का खाने या फिर पानी पर रहने और रात में हाई कैलोरी युक्त भोजन करने से आपके बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है, इसीलिए पूरे दिन बैलेंस डाइट लेनी चाहिए और रात में हल्का-फुल्का़ लेना चाहिए।
कुछ लोग नवरात्र के व्रत में सिर्फ पानी या सिर्फ फलाहार का उपवास करते हैं जिससे पाचनतंत्र खराब हो सकता है।
कुट्टू, तैलीय भोजन, अधिक आलू इत्यादि खाने से भी स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है।
 
व्रत-उपवास का सही तरीका (Fast-fast way):-
पूरा दिन पानी पर रहना भी नुकसानदायक हो सकता है।
व्रत के दौरान हेल्दी खाना नहीं खाना या व्रत के दौरान कुछ भी नहीं खाना आपकी सेहत के लिए एक बड़ी लापरवाही हो सकती है।
नवरात्र के दौरान कुछ लोग यह सोचते हैं कि इससे वे अपना वजन नियंत्रित कर लेंगे जिसके चलते वे अकसर दिन भर में सिर्फ एक बार खाना खाते हैं।
अचानक पानी पर रहने या दिन में एक बार खाना खाने से न सिर्फ शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है बल्कि शरीर में वसा की मात्रा भी बढ़ती है।
इसी कारण से व्रत के दौरान भी हर दो-तीन घंटे में फल और सलाद, जूस इत्यादि लेते रहें। खीरा, खरबूज जैसे फलों को खाते रहने से डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होगी और वजन बढ़ने का खतरा भी नहीं रहेगा।
सुबह उठने के बाद ज्यादा देर तक भूखे रहने से एसीडिटी और लो ब्लडप्रेशर आदि की परेशानी हो सकती है।
 
नवरात्र व्रत के लाभ(Profit of Navratri fasts ):-
पूरा दिन भूखा रहना और रात में हैवी खाना खाने से बेहोशी आना, चक्कर आना, सिर दर्द होना, कमजोरी महसूस होना इत्यादि समस्याएं होने की आशंका बढ़ जाती है।
नौ दिन तक कम खाने और व्रत के बाद अचानक गरिष्ठ और भारी भोजन करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। व्रत रखने से कुछ लोगों का वजन भी बढ़ जाता है, इसीलिए कमजोरी और अन्य परेशानियों से बचने के लिए व्रत के दौरान हल्का-फुल्का या फिर पेय पदार्थ अवश्य लेते रहना चाहिए।
नवरात के व्रत में आप फलाहार ले सकते हैं लेकिन भूखे रहकर व्रत न करें।
रोगियों, वरिष्ठ जनों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को उपवास नहीं रखना चाहिए।
डाइटिंग के लिए व्रत रख रहे हैं तो अच्छा होगा किसी एक्सपर्ट की सलाह लें और शेड्यूल बना उसे फॉलो करें।
अगर आप चाहते हैं कि व्रत के दौरान आपका वजन बढ़ने के बजाय कम हो जाए तो आपको अपनी प्रतिदिन की कैलोरी 1200 कैलोरी तक ही सीमित करनी होगी। इसके साथ ही आपको अधिक से अधिक मात्रा में तरल पदार्थ लेने होंगे। शिकंजी, लस्सी, शहद डालकर मिल्क शेक आदि लिए जा सकते हैं।

ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के कुछ घरेलू नुस्खे (Some Home Remedies to Prevent Breast Cancer)

http://desi-prescriptions.blogspot.in/2015/10/some-home-remedies-to-prevent-breast.html
ब्रेस्ट कैंसर या स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाली एक भयावह बीमारी है। हालांकि यह एक भ्रम है कि ब्रेस्ट कैंसर सिर्फ महिलाओं में होता है। आज पुरूषों में भी इस बीमारी की संख्या बढ़ रही है। कैंसर से बचने का सिर्फ एक ही उपाय है जागरूकता और विश्व स्वास्थ्य संगठन का ध्येय है, अक्टूबर महीने को ब्रेस्ट जागरूकता माह मानकर लोगों को इस बीमारी के लिए जागरूक करना।
भारत में महिलाएं आज भी अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक नहीं हैं और यही कारण है कि इस बीमारी की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है।मैक्स हैल्थैकेयर के रेडियेशन आंकालाजिस्ट डाक्टर ए.के आनंद का कहना है कि महिलाओं और पुरूषों में होने वाले इस कैंसर के वास्तकविक कारणों का पता नहीं चल पाया है, लेकिन ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि यह हार्मोनल या अनुवांशिक कारणों से होता है।

• स्तन कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 40 वर्ष की उम्र के बाद इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।
• अगर आपके परिवार में पहले से किसी को कैंसर रहा है , तो 40 वर्ष की उम्र के होने के बाद, साल में एक बार जांच ज़रूर करायें।
• अगर आप धूम्रपान या मादक पदार्थो का सेवन करती हैं तो भी आपमें कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के कुछ घरेलू नुस्खे (Some Home Remedies to Prevent Breast Cancer):-

काली मिर्च: काली मिर्च में बहुत अधिक मात्रा में एण्टीआक्सिडेंट्स होते हैं इसलिए यह किसी भी प्रकार के कैंसर से आपकी सुरक्षा करता है।इसमें पैपरीन होता है, जो एण्टी कैंसर के रूप में प्रयोग किया जाता है।
 
लहसुन‬: लहसुन में भी एण्टींआक्सिडेंट्स अधिक मात्रा में होते हैं, जिससे यह भी एण्टीम कैंसर आहार माना जाता है। यह कार्सिनोजेनिक कंपाउन्डक को बनने से रोकता है और कैंसर से शरीर की सुरक्षा करता है।हरी

चाय: हरी चाय सदियों से अपने औषधीय गुणों के कारण मानी जानती है।
यह विभिन्न प्रकार के कैंसर से आपकी सुरक्षा करता है।
प्रतिदिन‬ हरी चाय के सेवन से कैंसर के सेल्सह का बनना बंद हो जाता है। दिनमें 3 बार हरी चाय पीने से शरीर में पूरी तरह से कैंसर के सेल्सर का बनने की संभावना खत्म हो जाती है।
हल्दी‬: खाने में प्रयोग किये जाने वाले इन सामान्यस चीज़ों का इस्ते माल ज़रूर करें क्योंकि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह अच्छे होते हैं।
हल्दी में सर्कूमीन नामक फाइटोन्यूकट्रियेन्ट होता है, जो सर्विक्स् कैंसर से शरीर की सुरक्षा करता है।कैंसर से बचने का इससे आसान और सरल उपाय क्या होगा, जो आपके किचनमें ही आपको मिल सकता है!

Thursday, 8 October 2015

प्याज़ के स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits of Onion)

प्याज (Onion)  इसके  फायदे बहुत होते हैं और यह बहुत ही शानदार घरेलू नुस्खा (Home Remedy) है। प्याज खाने को स्वादिष्ट बनाने का काम तो करता ही है साथ ही यह एक superfine औषधि भी है। कई बीमारियों में यह रामबाण दवा के रूप में काम करता है

ब्लडप्रेशर(blood pressure):-यह ब्लडप्रेशर(blood pressure)पर नियंत्रण करता है। साथ ही, ग्लूकोज टॉलेरेंस में भी सुधार करता है। इसमें उपस्थित एलिल प्रोपल डिसल्फाइड भी रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मददगार होता है। इस प्याज में पाई जाने वाली सल्फर की मात्रा भी ब्लडप्रेशर को कंट्रोल करने में सहायता करती है।

गठिया के दर्द (Arthritis Pain) :-यह गठिया और अस्थमा के रोगियों के लिए लाभदायक रहता है। पेक्टिन कोलोडिसल काब्रोहाइड्रेट होता है। यह हरे प्याज में मौजूद होता है। इससे पेट के कैंसर का खतरा कम हो जाता है। हरा प्याज दिल को स्वस्थ रखता है। आपको पता है कि हरे प्याज में Anti-inflammatory और Anti-histamine गुण भी होते हैं।
जोड़ो के दर्द (Joint Pain) :-  में प्याज बहुत ही फायदेमंद होता है।  प्याज का रस और mustard oil बराबर मात्रा में मिलाकर मालिश करने से गठिया के दर्द (Arthritis Pain) में आराम मिलता है।

शीघ्र वीर्य स्खलन से छुटकारा दिलाती है इमली! (Tamarind early ejaculation helps to relive!)

इमली का खट्टा-मीठा स्वाद किसी के भी मुंह में देखते ही पानी ला देता है। इसीलिए इमली का उपयोग खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। मगर बहुत कम लोग जानते हैं कि इमली सिर्फ टेस्टी ही नहीं है यह स्वाद के साथ सेहत से भी भरी है। जी हां सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन यह सच है इमली कई तरह के औषधीय गुणों से भरपूर है।
चलिए आज जानते है इमली से जुड़े कुछ ऐसे ही लाजवाब हर्बल नुस्खों के बारे में.....

 (1) वीर्य – पुष्टिकर योग : इमली के बीज दूध में कुछ देर पकाकर और उसका छिलका उतारकर सफ़ेद गिरी को बारीक पीस ले और घी में भून लें, इसके बाद सामान मात्रा में मिश्री मिलाकर रख लें | इसे प्रातः एवं शाम को ५-५ ग्राम दूध के साथ सेवन करने से वीर्य पुष्ट हो जाता है | बल और स्तम्भन शक्ति बढ़ती है तथा स्व-प्रमेह नष्ट हो जाता है |

(२) शीघ्रपतन : लगभग ५०० ग्राम इमली ४ दिन के लिए जल में भिगों दे | उसके बाद इमली के छिलके उतारकरछाया में सुखाकर पीस ले | फिर ५०० ग्राम के लगभग मिश्री मिलाकर एक चौथाई चाय की चम्मच चूर्ण (मिश्री और इमली मिला हुआ) दूध के साथ प्रतिदिन दो बार लगभग ५० दिनों तक लेने से लाभ होगा |

(३) बहुमूत्र या महिलाओं का सोमरोग : इमली का गूदा ५ ग्राम रात को थोड़े जल में भिगो दे, दूसरेदिन प्रातः उसके छिलके निकालकर दूध के साथ पीसकरऔर छानकर रोगी को पिला दे | इससे स्त्री और पुरुषदोनों को लाभ होता है | मूत्र- धारण की शक्ति क्षीण हो गयी हो या मूत्र अधिक बनता हो या मूत्रविकार के कारण शरीर क्षीण होकर हड्डियाँ निकल आयी हो तो इसके प्रयोग से लाभ होगा |

(४) अण्डकोशों में जल भरना : लगभग ३० ग्राम इमली की ताजा पत्तियाँ को गौमूत्र में औटाये | एकबार मूत्र जल जाने पर पुनः गौमूत्र डालकर पकायें | इसके बाद गरम – गरम पत्तियों को निकालकर किसी अन्डी या बड़े पत्ते पर रखकर सुहाता- सुहाता अंडकोष पर बाँध कपड़े की पट्टी और ऊपर से लगोंट कास दे | सारा पानी निकल जायेगा और अंडकोष पूर्ववत मुलायम हो जायेगें |

इमली में कई तरह के औषधीय गुण मौजूद है। इमली शीघ्र वीय स्खलन से छुटकारा दिलाने के अलावा गर्मी लू लगने से भी बचाती है। इसके अलावा गले कीसूजन, चर्म रोग, खूनी बवासीर जैसी बीमारियों के लिए भी रामबाण है इमली

Tuesday, 6 October 2015

प्रेग्‍नेंसी के दौरान होने वाली समस्‍याएं (Problems occurring during pregnancy)

प्रेग्‍नेंसी के दौरान उल्टियां, बार बार पेशाब आना, खून की कमी, व पैरों की सूजन से बहुत परेशानी होती है। परेशानी है तो निदान भी हैं।(During pregnancy, vomiting, frequent urination, blood loss, and swelling of the legs is so embarrassing. If problems are diagnosed.)


प्रेग्‍नेंसी के दौरान होने वाली समस्‍याएं

प्रेग्‍नेंसी के दौरान बहुत सी ऐसी समस्‍याएं हैं। जिनसे बहुत परेशानी होती है। जिनमें मुख्‍य है उल्‍टी का आना। यह दिखने में छोटी समस्‍या जरूर है, पर यह किसी भी महिला के हौसले को तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ती। इसी तरह बार बार पेशाब का आना, खाना अच्‍छा नहीं लगना, गैस, पैरों में सूजन, खून की कमी आदि भी बड़ी दिक्‍कतें पैदा करती हैं। इन्‍ही कुछ समस्‍याओं का निदान नीचे दिया गया है। आशा है कि आपके कुछ काम आ सकेगा।

बार बार पेशाब का आना

१ * यदि बार बार पेशाब आ रही हो, तो अनार के छिलकों को सुखाकर उसका चूर्णं बना लें। फिर ५ ग्राम की मात्रा में इस चूर्णं को पानी के साथ लेने से बहुत लाभ होता है।

२ * एक केले के साथ बिदारीकंद और शताबरी का एक-एक ग्राम चूर्णं मिलाकर दूध के साथ पीने से बार बार पेशाब जाने की समस्‍या कम हो जाती है।

३ * दिन में दो तीन बार छुआरा खाएं और रात में छुआरा खाकर दूध पीने से आराम मिलता है।

४ * पचास ग्राम भुने चने खाकर ऊपर से थोड़ा सा गुड़ खाएं। दस दिन सेवन करने से आराम मिलेगा।

५ * तीन आंवलों का रस निकालकर उसमें पानी मिलाकर सुबह शाम पीने से लाभ होता है।

प्रेग्‍नेंसी के दौरान उल्‍टी होने पर

 
१ * एक कागज़ी नींबू को काटकर दो टुकड़े कर लें। दोनों भागों पर काली मिर्च का चूर्णं व नमक बुरक कर आग पर गर्म करके चूसें। आपको लाभ होगा।

२ * सुबह उठकर मुंह धोकर हल्‍के कुनकुने पानी में एक नींबू का रस निचोड़कर खाली पेट कुछ दिनों तक पिएं। इससे उल्टियां आना बंद हो जाएंगी।

३ * अनार के दानों का रस थोड़ा थोड़ा करके चूसने से भी उल्‍टी में बहुत लाभ होता है।

४ * गर्मी का मौसम हो तो बर्फ के पानी का सेवन करने से भी लाभ होता है।

५ * संतरे, मौसमी व पके आम का रस व नारियल पानी भी बहुत फाएदेमंद होता है।

६ * गर्भवती स्‍त्री के पेट पर पानी की पटटी रखने से भी उल्टियों में आराम मिलता है।

७ * गुलकंद और शक्‍कर बराबर मात्रा में मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से भी आराम मिलता है।

खून की कमी

 
१ * गाजर का रस और चुकंदर का रस मिलाकर पीना बहुत लाभकारी होता है।

२ * रोजाना एक ग्‍लास टमाटर का रस पीने से भी खून की कमी दूर होती है।

३ * रोज ५ – १० खजूर खाकर ऊपर से एक कप गर्म दूध पीने से थोड़े ही दिन में नया खून बनना शुरू हो जाता है। जिससे शरीर में स्‍फूर्ति और ताकत बढ़ती है।

४ * सुबह शाम दूध के साथ एक-एक नग आंवले का मुरब्‍बा खाने से खून की कमी दूर हो जाती है।

५ * अंजीर को दूध में उबालें। फिर उसे खाकर दूध पी जाएं। इससे खून की कमी दूर होती है।

६ * गन्‍ने के रस में आंवले का रस और शहद मिलाकर पीने से खून बढ़ता है।

७ * रोजाना पपीते का सेवन करने से भी खून की कमी नहीं होती। इसमें लौह तत्‍व की अधिकता होती है। जो खून बनाने में सहायक होता है।

८ * गाजर की सलाद या फिर गाजर का मुरब्‍बा भी लाभकारी होता है। गाजर के मुरब्‍बे के लिए अच्‍छी मोटी गाजर को छीलकर बीच का कड़ा भाग निकाल दें। गूदे को कांटे से गोद कर पानी में हल्‍का सा उबालकर कपड़े पर फैला दें। इसके बाद एक किलो शक्‍कर की एक तार वाली चाशनी बनाकर गाजर पकाएं। पकाते वक्‍त नींबू का रस भी डाल दें। ठंडा होने पर कांच के बर्तन में भरकर रख लें और रोज सुबह खाएं।

९ * बथुआ के साग का सेवन भी बहुत फाएदेमंद होता है। इससे खून में हीमोग्‍लोबिन की मात्रा बढ़ती है।

१० * ठंडे पानी में साफ किए गए चोकर को उसके वजन के छह गुना पानी में किसी बर्तन में ढंक कर आधे घंटे तक उबालें। स्‍वाद के लिए इसमें शहद व नींबू का रस मिला सकते हैं। एक-एक कप सुबह शाम पीने से खून की कमी दूर होती है।

यदि खाने के प्रति अरूचि हो तो...

१ * हरी धनिया, टमाटर काग़जी़ नींबू, हरी मिर्च, काला नमक, अदरक का सलाद या चटनी बनाकर खाएं। इससे भोजन के प्रति रूचि उत्‍पन्‍न होगी।

 
२ * सभी प्रकार के खटटे फलों या उनके रस का पानी में मिलाकर पीने से शरीर में दूषित पदार्थों की कमी होती है और रक्‍त क्षारीय होकर खाने के प्रति रूचि पैदा करता है।

३ * रोज नाश्‍ते में पपीते का सेवन करें। इससे भूख खुलकर लगती है।

४ * तरबूज के दस ग्राम बीज पीसकर आधे कप पानी में घोलकर, उसमें ५ ग्राम मिश्री और आधा नींबू का रस मिलाकर भोजन से १५ – २० मिनट पहले लेने से बहुत फाएदा होता है।

५ * धनिया, काला जीरा, सोंठ और सेंधा नमक को बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्णं बना लें। फिर २ – २ ग्राम चूर्णं दिन में तीन चार बार लेने से भोजन के प्रति रूचि पैदा होती है।

गर्भावस्‍था में गैस हो तो...

 
१ * ककड़ी, गाजर, टमाटर, मूली, पालक के सलाद में अदरक के बारीक टुकड़े काटकर उस पर नींबू निचोड़कर रोजाना सेवन करने से गर्भवती स्‍त्री को गैस की शिकायत नहीं होगी। साथ ही कब्‍ज भी दूर हो जाएगा।

२ * दो सौ ग्राम फालसे के रस में थोड़ी मिश्री, काला नमक व नींबू मिलाकर खाने से भी गैस की समस्‍या से छुटकारा मिलता है।

३ * बीस ग्राम सेंधा नमक और ५० ग्राम चीनी को एक साथ पीस कर किसी चीज में रख लें। फिर खाना खाने के बाद रोजाना आधा चम्‍मच खाने से गैस की शिकायत दूर हो जाएगी।

४ * गैस की शिकायत होने पर एक कप पानी में आधा नीबू का रस निचोड़कर उसमें थोड़ी सी सौंफ का चूर्णं व काला नमक मिलाकर कुछ दिनों तक रोजाना सेवन करें। इससे लाभ होगा।

५ * एक-एक नग आंवले का मुरब्‍बा सुबह शाम खाकर दूध पीने से भी गैस और अम्‍लपित्‍त की शिकायत दूर हो जाती है।

६ * भोजन से १५ मिनट पहले अजवायन का आधा चम्‍मच चूर्णं थोड़ा सा काला नमक मिलाकर सेवन करें और भोजन के १५ मिनट बाद भी यही प्रयोग करें। आपको आराम मिलेगा।

पैरों में सूजन

 
१ * बरगद के पत्‍तों को घी में चुपड़कर उनको गर्म करके पैरों पर बांधने से गर्भवती स्‍त्री के पैरों की सूजन दूर हो जाती है।

२ * गर्भावस्‍था में पैरों की सूजन में काले जीरे के काढ़े से पैरों को धोने से भी बहुत आराम मिलता है।

३ * अजवायन का बारीक चूर्णं पैरों में धीरे धीरे मलें। आपको बहुत लाभ होगा।


४ * अनन्‍नास को छीलकर उसको गोल गोल टुकड़ों में काट लें। फिर उस पर काली मिर्च का चूर्णं और काला नमक बुरक कर खाने से बहुत फाएदा होता है। इससे मूत्र में वृद्धि होती है, जिससे सूजन कम हो जाती है।