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Tuesday, 6 October 2015

जामुन के फायदे (The Advantages of Black Berries)

jamun ke faayade
जामुन के फायदे 

जामुन खाने में तो स्वादिष्ट  होता ही साथ ही इसके कई औषधीय गुण भी होते हैं। जामुन को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है – राजमन, काला जामुन, जमाली, ब्लैकबेरी आदि। इसकी प्रकृति अम्लीय और कसैली होती है, लेकिन इसका स्वाद खाने में मीठा होता है। अम्लीय होने के कारण जामुन को नमक के साथ खाया जाता है। जामुन में ग्लूकोज और फ्रक्टोज पाया जाता है। इसमें खनिजों की मात्रा अधिक होती है। इसके बीज में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। जामुन में आयरन, विटामिन और फाइबर पाया जाता है। आइए जानते हैं कि जामुन आपके स्वास्‍थ्‍य के लिए कितना फायदेमंद है। 


जामुन के फायदे – 
जामुन शरीर की पाचनशक्ति को मजबूत करता है। जामुन खाने से पेट सं‍बंधित विकार कम होते हैं। 
मधुमेह के उपचार के लिए जामुन बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। मधुमेह के रोगी जामुन की गुठलियों को सुखाकर, पीसकर उनका सेवन करें। इससे शुगर का स्तर ठीक रहता है। 
जामुन में एंटी कैंसर के गुण भी पाये जाते हैं। कीमोथेरेपी और रेडिएशन में भी जामुन फायदेमंद होता है।
जामुन का पका हुआ फल खाने से पथरी में फायदा होता है। जामुन की गुठली के चूर्ण को दही के साथ मिलाकर खाने से पथरी में फायदा होता है। 
लीवर के लिए जामुन का प्रयोग बहुत फायदेमंद होता है। कब्ज और पेट के रोगों के लिए जामुन बहुत फायदेमंद होता है। 
मुंह में छाले होने पर जामुन के रस का प्रयोग करने से छाले समाप्त हो जाते हैं। 
दस्त या खूनी दस्त होने पर जामुन बहुत फायदेमंद है। दस्त होने पर जामुन के रस को सेंधानमक के साथ मिलाकर खाने से दस्त होना बंद हो जाता है। 
मुंहासे होने पर, जामुन की गुठलियों को सुखाकर पीस लीजिए। इस पाउडर में रात को सोते समय गाय का दूध मिलाकर चेहरे पर लगाइए, इस लेप को सुबह ठंडे पानी से धुल लीलिए। 
अगर आवाज फंस गई हो या फिर बोलने में दिक्कत हो रही हो तो, जामुन की गुठली के काढे से कुल्ला कीजिए। आवाज को मधुर बनाने के लिए जामुन का काढा बहुत फायदेमंद है। 
जामुन की छाल को बारीक पीसकर हर रोज मंजन करने से दांत मजबूत और रोगरहित होते हैं। 
एसिडिटी होने पर जामुन को काला नमक, भूना हुआ चूर्ण और काला नमक के साथ सेवन कीजिए। एसिडिटी समाप्त हो जाएगी। 


जामुन खाने में तो स्वादिष्ट होता ही साथ ही इसके कई औषधीय गुण भी होते हैं। जामुन को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है – राजमन, काला जामुन, जमाली, ब्लैकबेरी आदि। इसकी प्रकृति अम्लीय और कसैली होती है, लेकिन इसका स्वाद खाने में मीठा होता है। अम्लीय होने के कारण जामुन को नमक के साथ खाया जाता है। जामुन में ग्लूकोज और फ्रक्टोज पाया जाता है। इसमें खनिजों की मात्रा अधिक होती है। इसके बीज में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। जामुन एक स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक फल है। जामुन आयरन, विटामिन और फाइबर पाया जाता है। आइए जानते हैं कि जामुन आपके स्वास्‍थ्‍य के लिए कितना फायदेमंद है। 
 जामुन के फायदे – जामुन शरीर की पाचनशक्ति को मजबूत करता है। जामुन खाने से पेट सं‍बंधित विकार कम होते हैं। 
  • मधुमेह के उपचार के लिए जामुन बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। मधुमेह के रोगी जामुन की गुठलियों को सुखाकर, पीसकर उनका सेवन करें। इससे शुगर का स्तर ठीक रहता है। 
  • जामुन में एंटी कैंसर के गुण भी पाये जाते हैं। कीमोथेरेपी और रेडिएशन में भी जामुन फायदेमंद होता है।
  • जामुन का पका हुआ फल खाने से पथरी में फायदा होता है। जामुन की गुठली के चूर्ण को दही के साथ मिलाकर खाने से पथरी में फायदा होता है। लीवर के लिए जामुन का प्रयोग बहुत फायदेमंद होता है। कब्ज और पेट के रोगों के लिए जामुन बहुत फायदेमंद होता है। 
  • मुंह में छाले होने पर जामुन के रस का प्रयोग करने से छाले समाप्त हो जाते हैं। 
  • दस्त या खूनी दस्त होने पर जामुन बहुत फायदेमंद है। दस्त होने पर जामुन के रस को सेंधानमक के साथ मिलाकर खाने से दस्त होना बंद हो जाता है। 
  • मुंहासे होने पर, जामुन की गुठलियों को सुखाकर पीस लीजिए। इस पाउडर में रात को सोते समय गाय का दूध मिलाकर चेहरे पर लगाइए, इस लेप को सुबह ठंडे पानी से धुल लीलिए। 
  • अगर आवाज फंस गई हो या फिर बोलने में दिक्कत हो रही हो तो, जामुन की गुठली के काढे से कुल्ला कीजिए। आवाज को मधुर बनाने के लिए जामुन का काढा बहुत फायदेमंद है। 
  • जामुन की छाल को बारीक पीसकर हर रोज मंजन करने से दांत मजबूत और रोगरहित होते हैं। 
  • एसिडिटी होने पर जामुन को काला नमक, भूना हुआ चूर्ण और काला नमक के साथ सेवन कीजिए। एसिडिटी समाप्त हो जाएगी। 

Wednesday, 23 September 2015

बूढ़े भी दौड़ने लगे ऐसे हैं ‘ज्वाइंट पेन’ के ये देसी नुस्खे.

 बूढ़े भी दौड़ने लगे ऐसे हैं ‘ज्वाइंट पेन’ के ये देसी नुस्खे.
1. लगभग 8-10 लहसुन की कली को तेल या घी में तल लें और खाना खाने सेपहले उसे चबाएं। इससे जोड़ों के दर्द से तुरंत आराम मिलता है।
-डांग जिला गुजरात के हर्बल जानकारों का मानना है कि लहसुन की कलियों को तलकर या गर्म करके कपूर के साथ मिलाकर दर्द वाली जगह पर थोड़ी देर तक मालिश की जाए तो तुरंत आराम मिलता है।

2. साटोडी के फूल,आबा हल्दी और अदरक की समान मात्रा को मिक्स कर उसका काढ़ा तैयार कर लें। इस काढ़े की दो-तीन चम्मच मात्रा का सेवन करें। इससे भी जोड़ों का दर्द दूर होता है।

3. आंकडा के ताजी पत्तियों पर सरसों का तेल के साथ लेप तैयार कर लें। इस लेप को हल्का गर्म कर दर्द वाली जगह पर लगाने से भी आराम मिलता है.

4. दालचीनी का 2 ग्राम का चूर्ण एक कप पानी में मिलाकर रोजाना सुबह पिएं। इससे जोड़ों के दर्द में काफी आराम मिलता है। डांग जिले के आदिवासियों के अनुसार यह फॉमरूला डायबिटीज की समस्या से भी निजात दिलाने में सहायक है। आदिवासियों के अनुसार खाने-पीने में भी दालचीनी का उपयोग शरीर को कई तरह की समस्याओं से दूर रखता है।

5. बरसात के दिनों में इंद्रावन के फल का गूदा, नमक और आजवाइन के मिश्रण का सेवन न सिर्फ जोड़ों के दर्द से मुक्ति दिलाता है, बल्कि यह आर्थरायटिस में भी शरीर को काफी लाभ पहुंचाता है।

6. आदिवासी आमतौर पर अनंतवेल के पत्तों की चाय पीते हैं। अनंतबेल की एक ग्राम जड़ लगभग एक कप चाय के लिए काफी है। अगर दिन में दो बार इसका सेवन किया जाए तो जोड़ों के दर्द से तुरंत निजात मिल जाती है।

7. आदिवासी हरी घास, अदरक, दालचीनी और लोंग की समान मात्रा को मिश्रित कर इसकी गोली बनाते हैं। वे इस गोली का नियमित सेवन करते हैं और इसके साथ कम से कम 5 मिली पानी पीने की सलाह देते हैं। यह प्रकिया अगर लगातार एक महीने तक आजमाई जाए तो जोड़ों का दर्द खत्म हो जाता है।

8. पारिजात के 6-7 ताजे पत्ते अदरक के साथ पीस लें और शहद का साथ इसका सेवन करें तो इससे न केवल जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है, बल्कि शरीर की अन्य तकलीफें भी खत्म हो जाती हैं। माना जाता है कि इस फॉमरूले का सेवन सायटिका जैसे रोगों से निजात दिलाने में भी बहुत सहायक है।