जामुन
खाने में तो स्वादिष्ट होता ही साथ ही इसके कई औषधीय गुण भी होते हैं।
जामुन को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है – राजमन, काला जामुन, जमाली,
ब्लैकबेरी आदि। इसकी प्रकृति अम्लीय और कसैली होती है, लेकिन इसका स्वाद
खाने में मीठा होता है। अम्लीय होने के कारण जामुन को नमक के साथ खाया जाता
है। जामुन में ग्लूकोज और फ्रक्टोज पाया जाता है। इसमें खनिजों की मात्रा
अधिक होती है। इसके बीज में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और कैल्शियम अधिक
मात्रा में पाया जाता है। जामुन एक स्वास्थ्यवर्धक फल है। जामुन आयरन, विटामिन और फाइबर पाया जाता है। आइए जानते हैं कि जामुन आपके स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद है।
जामुन के फायदे – जामुन शरीर की पाचनशक्ति को मजबूत करता है। जामुन खाने से पेट संबंधित विकार कम होते हैं।
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Tuesday, 6 October 2015
जामुन के फायदे (The Advantages of Black Berries)
चक्कर आने पर घरेलू उपचार (Swirl of domestic remedies)
चक्कर
आने पर घरेलू उपचार के बारे में हम आपको बताएगें लेंकिन सब से पहले हम यह
जान लेते है कि चक्कर आना किसे कहते है कभी-कभी किसी को चक्कर आते हैं,
थोड़ी देर तक बैठे रहने के बाद जैसे ही उठते हैं, आंखों के सामने अंधेरा छा
जाता है। ऐसा लगता होगा कि आपके चारो ओर की चीजें तेजी से घूम रही हैं। यह
तब होता है, जब मस्तिष्क में रक्त की पूर्ति कम हो जाती है। रक्तचाप में
अचानक कमी से भी यह स्थिति पैदा हो सकती है। घर में रखी चीजों द्धारा आप इस
का उपचार कर सकती है। आइए जानें इन उपायों के बारें में-
चक्कर आने पर घरेलू उपचार
- पकने के बाद सूखी हुई लौकी को डण्ठल की तरफ से काट दें, ताकि अन्दर का खोखलापन दिखाई दे। अगर सूखा गूदा हो तो उसे निकाल दें। अब इसमें ऊपर तक पानी भर कर 12 घण्टे तक रखें फिर हिलाकर पानी निकाल कर साफ कपड़े छान लें। इस पानी को ऐसे बर्तन में भरें, जिसमें आप अपनी नाक डुबो सकें। नाक डुबोकर जोर से सांस खींचें, ताकि पानी नाक से अन्दर चढ़ जाए। पानी खींचने के बाद नाक नीची करके आराम करें। इस उपाय से चक्कर आने की समस्या सदा के लिए खत्म हो जाती है।
- चक्कर आने पर तुलसी के रस में चीनी मिलाकर सेवन करने से या तुलसी के पत्तों में शहद मिलाकर चाटने से चक्कर आना बंद हो जाता है।
- चक्कर आने पर धनिया पाउडर दस ग्राम तथा आंवले का पाउडर दस ग्राम लेकर एक गिलास पानी में भिगो कर रख दें। सुबह अच्छी तरह मिलाकर पी लें। इससे चक्कर आने बंद हो जाते है।
- सिर चकराने पर आधा गिलास पानी में दो लौंग डालकर उसे उबाल लें और फिर उस पानी को पी लें। इस पानी को पीने से लाभ मिलता है।
- 10 ग्राम आंवला, 3 ग्राम काली मिर्च और 10 ग्राम बताशे को पीस लें। 15 दिनों तक रोजाना इसका सेवन करें चक्कर आना बंद हो जाएगा।
- जिन लोगों को चक्कर आते हैं उन्हें दोपहर के भोजन के 2 घंटे पहले और शाम के नाश्ते में फलों का जूस पीना चाहिए। रोजाना जूस पीने से चक्कर आने बंद हो जाएंगे। लेकिन ध्यान रखें कि जूस में किसी प्रकार का मीठा या मसाला नहीं डालें सदा जूस पियें। जूस की जगह चाहें तो ताजे फल भी खा सकते हैं।
- नारियल का पानी रोज पीने से भी चक्कर आने बंद हो जाते है।
- चाय व कॉफ़ी कम पीनी चाहिए। अधिक चाय व कॉफ़ी पीने से भी चक्कर आते हैं।
- 20 ग्राम मुनक्का घी में सेंककर सेंधा नमक डालकर खाने से चक्कर आने बंद हो जाते है।
- खरबूजे के बीजों को पीसकर घी में भुन लें। अब इसकी थोड़ी थोड़ी मात्रा सुबह शाम लें, इससे चक्कर आने की समस्या में बहुत लाभ होता है।
- इन सब घरेलू उपायों को अपनाकर आप चक्कर आने की समस्या से निजात पा सकती है लेकिन अगर समस्या, गंभीर है तो तुरन्त डाक्टर से संपर्क करें।
Thursday, 24 September 2015
केले के लाभ (Benefits of Banana)
वैसे तो केला बारह ही महीने बाजार में उपलब्ध रहता है। लेकिन बरसात के सीजन में ये शरीर के लिए विशेष लाभदायक होता है। कच्चा केला मीठा, ठण्डी तासीर का, भारी, स्निग्ध, कफकारक, पित्त, रक्त विकार, जलन, घाव व वायु को नष्ट करता है। पका हुआ केला स्वादिष्ट, शीतल, मधुर, वीर्यवर्ध्दक, पौष्टिक, मांस की वृध्दि करने वाला, रुचिकारक तथा भूख, प्यास, नेत्ररोग और प्रमेह का नाश करने वाला होता है।
- यदि महिलाओं को रक्त प्रवाह अधिक होता है तो पके केले को दूध में मसल कर कुछ दिनों तक खाने से लाभ होता है।
- बार-बार पेशाब आने की समस्या हो तो चार तोला केले के रस में दो तोला घी मिलाकर पीने से फायदा होता है।
- यदि शरीर का कोई हिस्सा जल जाए तो केले के गूदे को मसल कर जले हुए स्थान पर बांधे। इससे जलन दूर होकर आराम पहुंचता है।
- पेचिश रोग में थोड़े से दही में केला मिलाकर सेवन करने से फायदा होता है।
- संग्रहणी रोग होने पर पके केले के साथ इमली तथा नमक मिलाकर सेवन करें।
- दाद होने पर केले के गूदे को नींबू के रस में पीसकर पेस्ट बनाकर लगाएं।
- पेट में जलन होने पर दही में चीनी और पका केला मिलाकर खाएं। इससे पेट संबंधी अन्य रोग भी दूर होते हैं।
- अल्सर के रोगियों के लिये कच्चे केले का सेवन रामबाण औषधि है।
- केला खून में वृध्दि करके शरीर की ताकत को बढ़ाने में सहायक है। यदि प्रतिदिन केला खाकर दूध पिया जाए तो कुछ ही दिनों में व्यक्ति तंदुरुस्त हो जाता है।
- यदि चोट लग जाने पर खून का बहना न रुके तो उस जगह पर केले के डंठल का रस लगाने से लाभ होता है।
- केला छोटे बच्चों के लिये उत्तम व पौष्टिक आहार है। इसे मसल कर या दूध में फेंटकर खिलाने से लाभ मिलता है।
- केले और दूध की खीर खाने या प्रातः सायं दो केले घी के साथ खाने या दो केले भोजन के साथ घंटे बाद खाकर ऊपर से एक कप दूध में दो चम्मच शहद धोलकर लगातार कुछ दिन पीने से प्रदर रोग ठीक हो जाता है।
- केले का शर्बत बनाकर पीने से सूखी खांसी, पुरानी खांसी और दमे के कारण चलने वाली खांसी में 2-2 चम्मच सुबह-शाम सेवन करने से लाभ होता है।
- एक पका केला एक चम्मच घी के साथ 4-5 बूंद शहद मिलाकर सुबह-शाम आठ दिन तक रोजाना खाने से प्रदर और धातु रोग में लाभ होता है।
- पके केले को घी के साथ खाने से पित्त रोग शीघ्र शान्त होता है।
- मुंह में छाले हो जाने पर गाय के दूध के दही के साथ केला खाने से लाभ होता है।
- एक पका केला मीठे दूध के साथ आठ दिन तक तक लगातार खाने से नकसीर में लाभ होता है।
- दो केले एक तोला शहद में मिलाकर खाने से सीने के दर्द में लाभ होता है।
- दो पके केले खाकर, एक पाव गर्म दूध एक माह तक सेवन करने से दुबलापन दूर होकर शरीर स्वस्थ बनता है।
- प्रतिदिन भोजन के बाद एक केला खाने से मांसपेशियां मजबूत बनती है व ताकत देता है।
- प्रातः तीन केले खाकर, दूध में शक्कर व इलायची मिलाकर नित्य पीते रहने से रक्त की कमी दूर होती है।
- यदि बाल गिरते हों तो केले के गूदे में नींबू का रस मिलाकर सिर में लगाने से बाल झड़ना रूक जाता है।
- जलने या चोट लगने पर केले का छिलका लगाने से लाभ होता है।
- पके हुए केले को आंवले रस तथा शक्कर मिलाकर खाने बार-बार पेशाब आने की शिकायत होती है।
- बच्चे को दस्त लग जाने पर पके केले को कटोरी में रख कर चम्मच से घोट कर मक्खन जैसा बना लें और जरा सी मिश्री पीस कर मिला कर बच्चे को दिन में दो तीन बार खिलाएं। लाभ होगा, कमजोरी नहीं आएगी और बच्चे के शरीर में पानी की कमी नहीं हो पाएगी। ध्यान रहे कि केला जितनी बार खिलाना हो, उसे उसी समय बनाएं। ढक कर रखा गया या काट कर रखा केला न खिलाएं। वह हानिकारक हो सकता है। मिट्टी खाने के आदी बच्चों को इसका गूदा खूब फेंट कर जरा सा शहद मिला कर आधा आधा चम्मच खिलाना उपयोगी है। पर ध्यान रहे की शाम के बाद केला ना दे ।
- कोई भी चीज मात्रा से अधिक खाना पीना हानिकारक है। इसी तरह केला भी ज्यादा खाने से पेट पर भारी पड़ेगा, शरीर शिथिल होगा, आलस्य आएगा। कभी ज्यादा खा लिया जाए तो एक छोटी इलायची चबाना लाभकारी है।
- कफ प्रकृति वालों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। हमेशा पका केला ही खाएं।
- केले में मैग्नीशियम की काफी मात्रा होती है जिससे शरीर की धमनियों में खून पतला रहने के कारण खून का बहाव सही रहता है। इसके अलावा पूर्ण मात्रा में मैग्नीशियम लेने से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है।
- कच्चे केले को दूध में मिलाकर लगाने से त्वचा निखर जाती है और चेहरे पर भी चमक आ जाती है।
- रोज सुबह एक केला और एक गिलास दूध पीने से वजन कंट्रोल में रहता है और बार- बार भूख भी नहीं लगती।
- गर्भावस्था में महिलाओं के लिए केला बहुत अच्छा होता है क्योंकि यह विटामिन से भरपूर होता है।
- गले की सुजन में लाभकारी है।
- जी-मिचलाने पर तो पका केला कटोरी में फेंट कर एक चम्मच मिश्री या चीनी और एक छोटी इलायची पीस कर मिला कर खाने से राहत मिलेगी।
- केले के तने के सफेद भाग के रस का नियमित सेवन डायबिटीज की बीमारी को धीरे-धीरे खत्म कर देता है।
- खाना खाने के बाद केला खाने से भोजन आसानी से पच जाता है।
Wednesday, 23 September 2015
बूढ़े भी दौड़ने लगे ऐसे हैं ‘ज्वाइंट पेन’ के ये देसी नुस्खे.
बूढ़े भी दौड़ने लगे ऐसे हैं ‘ज्वाइंट पेन’ के ये देसी नुस्खे.
1. लगभग 8-10 लहसुन की कली को तेल या घी में तल लें और खाना खाने सेपहले उसे चबाएं। इससे जोड़ों के दर्द से तुरंत आराम मिलता है।
-डांग जिला गुजरात के हर्बल जानकारों का मानना है कि लहसुन की कलियों को
तलकर या गर्म करके कपूर के साथ मिलाकर दर्द वाली जगह पर थोड़ी देर तक मालिश
की जाए तो तुरंत आराम मिलता है।
2. साटोडी के फूल,आबा हल्दी और
अदरक की समान मात्रा को मिक्स कर उसका काढ़ा तैयार कर लें। इस काढ़े की
दो-तीन चम्मच मात्रा का सेवन करें। इससे भी जोड़ों का दर्द दूर होता है।
3. आंकडा के ताजी पत्तियों पर सरसों का तेल के साथ लेप तैयार कर लें। इस
लेप को हल्का गर्म कर दर्द वाली जगह पर लगाने से भी आराम मिलता है.
4. दालचीनी का 2 ग्राम का चूर्ण एक कप पानी में मिलाकर रोजाना सुबह पिएं।
इससे जोड़ों के दर्द में काफी आराम मिलता है। डांग जिले के आदिवासियों के
अनुसार यह फॉमरूला डायबिटीज की समस्या से भी निजात दिलाने में सहायक है।
आदिवासियों के अनुसार खाने-पीने में भी दालचीनी का उपयोग शरीर को कई तरह की
समस्याओं से दूर रखता है।
5. बरसात के दिनों में इंद्रावन के फल का
गूदा, नमक और आजवाइन के मिश्रण का सेवन न सिर्फ जोड़ों के दर्द से मुक्ति
दिलाता है, बल्कि यह आर्थरायटिस में भी शरीर को काफी लाभ पहुंचाता है।
6. आदिवासी आमतौर पर अनंतवेल के पत्तों की चाय पीते हैं। अनंतबेल की एक
ग्राम जड़ लगभग एक कप चाय के लिए काफी है। अगर दिन में दो बार इसका सेवन
किया जाए तो जोड़ों के दर्द से तुरंत निजात मिल जाती है।
7. आदिवासी
हरी घास, अदरक, दालचीनी और लोंग की समान मात्रा को मिश्रित कर इसकी गोली
बनाते हैं। वे इस गोली का नियमित सेवन करते हैं और इसके साथ कम से कम 5
मिली पानी पीने की सलाह देते हैं। यह प्रकिया अगर लगातार एक महीने तक आजमाई
जाए तो जोड़ों का दर्द खत्म हो जाता है।
8. पारिजात के 6-7 ताजे
पत्ते अदरक के साथ पीस लें और शहद का साथ इसका सेवन करें तो इससे न केवल
जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है, बल्कि शरीर की अन्य तकलीफें भी खत्म हो
जाती हैं। माना जाता है कि इस फॉमरूले का सेवन सायटिका जैसे रोगों से निजात
दिलाने में भी बहुत सहायक है।
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