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Tuesday, 23 August 2016

गर्भवती महिलाओं को खाना चाहिए अखरोट (Pregnant women should eat walnuts)

गर्भवास्था के समय महिलाओं का स‍ही खानपान बच्चे के विकास के लिए बहुत जरूरी होता है और इसलिए मां की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए उन्हें पौष्टिक और स्वास्थवर्धक भोजन दिया जाता है. फ्रूट, जूस, हरी सब्जियों के साथ ही फाइबर और प्रोटीन की संतुलित मात्रा मां और बच्चे दोनों को स्वस्थ रखने में सहायक होती है.

बच्चे के दिमाग के विकास के लिए गर्भवती महिलाओं को ड्राई फ्रूट्स खाने की सलाह दी जाती है और इसमें भी अखरोट खाना बहुत ही फायदेमंद होता है. अखरोट किस तरह मां और बच्चे के लिए है लाभकारी आइए जानें:


  •  अखरोट में फैटी एसिड होता है जो बच्चे को फूड एलर्जी के जोखिम से बचाता है. इसे खाने से बच्चे की ग्रोथ के लिए आवश्यवक तत्व भी मिलते हैं.
  •  अखरोट ऊर्जा का बेहतर स्रोत है. साथ ही इसमें शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व, मिनरल्स, एंटीआक्सीडेंट्स, ओमेगा-3, फैटी एसिड और विटामिन्स प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं जो मां और बच्चे के लिए बहुत लाभकारी होते हैं.
  •  अखरोट में पोटेशियम, सेलेनियम, कैल्शियम, मैंगनीज, कॉपर, आयरन, मैग्नीशियम और जिंक जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं जो बच्चे के दिमाग के विकास में मदद करते हैं. गर्भावस्था के दौरान अखरोट खाने से कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और हाई बीपी को कंट्रोल करने में मदद मिलती है.
  •  अखरोट में मौजूद कॉपर भ्रूण के सामान्य विकास के लिए आवश्यक है। अखरोट में मौजूद फैटी एसिड (अल्फा-लिनोलेनिक एसिड) बच्चे के दांतों और हड्डियों के विकास में मदद करता है.
  •  अखरोट में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ई, पॉलीफिनॉल और कॉपर मां की इम्युनिटी बढ़ाते हैं.
  •  अखरोट गर्भावस्था के दौरान शरीर के आंतरिक सूजन को कम करके ब्लड सर्क्यूलेशन को बढ़ता है. इससे बच्चे तक ज्यादा खून पहुंचता है.
  •  वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है जिससे मां डायबिटीज के खतरे से भी बची रहती है.
  • अखरोट खाने से गर्भवती महिलाओं में मेलाटोनिन नाम का हार्मोन बनता है जिससे उन्हें अच्छी नींद आती है.

Thursday, 10 December 2015

प्रेग्नेंसी के वक्त ध्यान रखें ये पांच मंत्र, टल जाएगी कई मुसीबतें (Keep in mind these five spells during pregnancy, many problems would be averted)

घर में 'नया मेहमान' आने वाला है, ऐसी बातें सुनते ही घर और आसपास के लोगों के चेहरे पर भी उत्साह से भरी मुस्कराहट बिखर जाती है। निश्चित तौर पर प्रेग्नेंसी का समय किसी भी महिला के जीवन के सबसे सुखद पलों में से एक होता है। लेकिन स्वस्थ प्रेग्नेंसी के लिये सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

इसलिये प्रेग्नेंसी के शुरुआती दौर में सतर्क रहना बेहद जरूरी है। जरा सी लापरवाही बहुत बड़े नुकसान की वजह बन सकती है। इसके परिणामस्वरूप प्री-टर्म डिलीवरी की आशंका बढ़ जाती है।
                     

                          प्री-मैच्योर डिलीवरी (समयपूर्व प्रसूति) के कुछ प्रमुख कारणः


देरी से गर्भधारणः कई प्रकार के तेजी से होते हार्मोन संबंधी शारीरिक परिवर्तनों के कारण यह प्री-मैच्योर डिलीवरी का सबसे आम कारण होता है।

शिफ्ट्स में काम करनाः बार-बार बदलता शेड्यूल भी प्री-मैच्योर डिलीवरी का कारण होता है क्योंकि इससे जैविक चक्र में परिवर्तन होता है।

एल्कोहलः शराब आदि के एल्कोहल युक्त पदार्थों का सेवन करने से यह नाल तक पहुंच जाती है, जिससे समय से पहले प्रसूति का खतरा बढ़ जाता है। यह बच्चे के अंगों को प्रभावित करता है।

जंक फूडः आवश्यक पोषक तत्वों की कमी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करने से प्रेग्नेंसी में जटिलताएं बढ़ जाती है, जिससे प्री-मैच्योर डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है।

तनावः प्रेग्नेंट महिलाओं के ज्यादा तनावग्रस्त रहने से भी प्री-मैच्योर डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है। इससे बच्चों के कम वजन के साथ जन्म लेने की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।
ज़ी मीडिया ब्‍यूरो

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Tuesday, 6 October 2015

गर्भधारण करके के लिए तथा बांझपन दूर करने के लिए कुछ अच्‍छे उपाय। (By pregnancies and infertility for some good measure to remove.)

गर्भधारण एवं बांझपन निवारक नुस्‍खे

 
आज के आधुनिक युग में गर्भधारण संबंधी बहुत सी परेशानियां हैं। बांझपन इसमें कोढ़ में खाज का काम करती है। मैं पिछले कुछ वर्षों से देख रही हूं कि अधिकांश महिलाओं को गर्भधारण में बहुत परेशानी आ रही है। हमारा खानपान और आधुनिक जीवन शैली हम पर ही भारी पड़ रही है। हर महिला का सपना होता है कि वह शादी के बाद जल्‍दी से जल्‍दी मां बने और उसके आंगन में बच्‍चों की किलकारियां गूंजें। पर यदि सब कुछ कुछ सामान्‍य नहीं है तो फिर बहुत परेशानी होती है। डॉक्‍टरों के यहां रोज रोज चक्‍कर लगाने से ही फुर्सत नहीं मिलती। आपकी कुछ मुश्किलों को मैं कर सकूं इसलिए कुछ अच्‍छे नुस्‍खे आपकी सेवा में प्रस्‍तुत कर रही हूं।

बांझपन की दशा में...

 
१ * सेमर की जड़ पीसकर ढाई सौ ग्राम पानी में पकाएं और फिर इसे छान लें। मासिक धर्म के बाद चार दिन तक इसका सेवन करें।

२ * ५० ग्राम गुलकंद में २० ग्राम सौंफ मिलाकर चबाकर खाएं और ऊपर से एक ग्‍लास दूध नियमित रूप से पिएं। इससे आपको बांझपन से मुक्ति मिल सकती है।

३ * गुप्‍तांगों की साफ सफाई पर विशेष ध्‍यान दें। खाने में जौ, मूंग, घी, करेला, शालि चावल, परवल, मूली, तिल का तेल, सहिजन आदि जरूर शामिल करें।

४ * पलाश का एक पत्‍ता गाय के दूध में औटाएं और उसे छानकर पिएं। मासिक धर्म के बाद से पीना शुरू करें और ७ दिनों तक प्रयोग करें।

५ * पीपल के सूखे फलों का चूर्णं बनाकर रख लें। मासिक धर्म के बाद ५ – १० ग्राम चूर्णं खाकर ऊपर से कच्‍चा दूध पिएं। यह प्रयोग नियमित रूप से १४ दिन तक करें।

६ * मासिक धर्म के बाद से एक सप्‍ताह तक २ ग्राम नागकेसर के चूर्णं को दूध के साथ सेवन करें। आपको फाएदा होगा।

७ * ५ ग्राम त्रिफलाधृत सुबह शाम सेवन करने से गर्भाशय की शुद्धि होती है। जिससे महिला गर्भधारण करने के योग्‍य हो जाती है।

गर्भधारण हेतू कुछ उपाय
 
१ * तीन ग्राम गोरोचन, १० ग्राम असगंध, १० ग्राम गजपीपरी तीनों को बारीक पीसकर चूर्णं बनाएं। फिर पीरिएड के चौथे दिन से निरंतर पांच दिनों तक इसे दूध के साथ पिएं।
२ * महिलाओं को शतावरी चूर्णं घी – दूध में मिलाकर खिलाने से गर्भाशय की सारी विकृतियां दूर हो जाएंगीं और वे गर्भधारण के योग्‍य होगी।
३ * १० ग्राम पीपल की ताज़ी कोंपल जटा जौकुट करके ५०० मि.ली. दूध में पकाएं। जब वह मात्र २०० मि.ली. बचे तो उतारकर छान लें। फिर इसमें चीनी और शहद मिलाकर पीरिएड होने के ५वें या ६ठे दिन से खाना शुरू कर दें। यह बहुत अच्‍छी औषधि मानी जाती है।

गर्भपात रोकने के कुछ उपाय

१ * पीपल की बड़ी कंटकारी की जड़ पीस कर भैंस के दूध के साथ कुछ दिनों तक लें।

२ * हरी दूब के पंचांग (जड़, तना, पत्‍ती, फूल, फल) को पीसकर उसमें मिश्री व दूध मिलाकर १५० – २०० ग्राम शरबत सुबह शाम पिएं।

३ * मूली के बीजों का महीन चूर्णं और भीमसेनी कपूर को गुलाब के अर्क में मिलाकर गर्भ ठहरने के बाद योनि में कुछ दिनों तक मलने से बहुत लाभ होता है। अगर किसी महिला को बार बार गर्भस्राव होता है, तो उसके लिए यह बहुत फाएदेमंद नुस्‍खा है।

४ * गाय का ठंडा किया हुआ दूध व जेठीमधु का काढ़ा बनाकर पिलाएं साथ में इसी काढ़े को नाभि के नीचे भाग पर लगाएं। इससे गर्भस्राव की संभावना कम हो जाती है।

५ * वंशलोचन, नागकेसर, मिश्री को लेकर महीन चूर्णं बनाएं। फिर इसे २ ग्राम की मात्रा में सुबह शाम गाय के दूध के साथ खाने से लाभ होता है।

६ * एक पके केले को मथकर उसमें शहद मिलाकर गर्भवती स्‍त्री को खिलाएं।

७ * अशोक की छाल का क्‍वाथ बनाकर कुछ दिनों तक सुबह शाम पिलाने से गर्भवती स्‍त्री के गर्भस्राव की संभावना खत्‍म हो जाती है।

गर्भनिरोधक उपाय

 
१ * केले का पेड़ जिस पर फल न लगा हो। या फलहीन पेड़ हो, उसकी जड़ उखाड़कर सुखा लें। उसका चूर्णं बनाकर रख लें। मासिक के समय ४ – ५ ग्राम की मात्रा में सेवन करने से गर्भ नहीं ठहरता।

२ * माहवारी खत्‍म होने के बाद तुलसी के पत्‍तों का काढ़ा चार दिन तक लगातार पीने से भी गर्भ ठहरने की संभावना कम हो जाती है।

३ * पपीता भी एक बहुत ही कारगर उपाय है। गर्भनिरोधक के रूप में इसे प्रयोग करें।

४ * सुबह उठने के बाद बासी मुंह (बिना कुल्‍ला किए) एक दो लौंग चबाने से भी गर्भ नहीं ठहरता है।

५ * मासिक धर्म के समय चंपा के फूलों को पीस कर पीने से गर्भधारण की संभावना नहीं रहती। जब तक बच्‍चा न चाहें, तब तक इसे प्रयोग कर सकती हैं।

६ * संभोग करने से पहले योनि में शहद लगाने से भी गर्भधारण नहीं होता है।

७ * संभोग से पहले योनि में नीम का तेल लगाने से गर्भ नहीं ठहरता है।


८ * नीम के तेल का सेवन करने से गर्भ नहीं ठहरता है। यह गर्भनिरोधकों में सबसे लाभदायक उपाय है।