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Tuesday, 6 October 2015

भारतीय जड़ी-बूटियाँ और फलों के अचूक नुस्खे (Indian herbs and fruit surefire tips)

 

वर्तमान काल में मनुष्य का जीवन इतना अधिक संघर्षमय हो गया है कि उसे अपने स्वास्थ्य की कम अपनी भौतिक-समृद्धि की चिन्ता अधिक है। स्वास्थ्य की देखभाल वह भागते-भागते करना चाहता है, अथवा अत्यधिक आरामतलब होने के कारण उसकी ओर से उदासीन हो जाता है। ऐलोपैथिक दवाओं का अत्यधिक सेवन कुछ समय के लिए उसे अवश्य स्वस्थ होने का एहसास करा देता है, किन्तु स्थायी स्वास्थ्य उसे कभी प्राप्त नहीं हो पाता। इसलिए जीवन की दौड़ में वह जल्दी थककर या तो बैठ जाता है या फिर दौड़ से ही बाहर हो जाता है।
आयुर्वेदिक चिकित्सा-पद्धति थोड़ी श्रम साध्य अवश्य है, किंतु शरीर को निरोग रखने और स्थायी स्वास्थ्य प्रदान करने में इस चिकित्सा पद्धति का कोई जोड़ नहीं है।



प्रकृति ने असंख्य रोग यदि उत्पन्न किए तो उनका निदान करने हेतु जड़ी-बूटियों को भी जन्म दिया। कोई ऐसा रोग नहीं है जिसका उपचार इन जड़ी-बूटियों के माध्यम से न किया जा सके। इस प्रकार प्रकृति यदि विनाश का कारण बनी है तो वह मानव जीवन की सशक्त रक्षक भी है।
महर्षि धन्वन्तरि आयुर्वेद के जनक माने जाते हैं। उनसे भी पहले अश्वनीकुमारों ने आर्युर्वेदिक चिकित्सा की नींव रखी थी। बाद में महर्षि चरक ने इस ज्ञान को विस्तृत फलक प्रदान किया। सदियों से भारतीय ऋषि मुनियों ने प्रकृति के मध्य से विविध जड़ी-बूटियों की खोज की और मनुष्य को स्वस्थ रखने में उन जड़ी-बूटियों का उपोयग किया। मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए जड़ी-बूटियाँ वरदान सिद्ध हुईं।