Tuesday, 25 July 2017

जानिये भुट्टा खाने के ये 10 फायदे | 10 Best Benefits Of Corn (Bhutta) For Skin, Hair And Health

खाने के इन 10 फ़ायदों को जान गये तो आज से खाने लगोगे, ये कैन्सर, ह्रदय, आँखो की रोशनी, ख़ून की कमी, क़ब्ज़, बालों की समस्या और वज़न बढ़ाने में कारगर हैमक्का या भुट्टा एक साबुत अनाज के रूप में उपयोग होने वाला भारत मेें प्रसिद्ध खाद्यपदार्थ है। मक्का से हमारे शरीर को फाइबर, विटामिन्स, कैरोटिनॉयड्स, फेरूलिक एसिड्स मिलता है जिससे शरीर को आंखो की समस्या, दिल के रोग, कैंसर जैसी बड़ी परेशानियों से दूर रखा जा सकता है।

    • मक्का जिसे हम बोलचाल की भाषा में भुट्टा, मकई और चल्ली भी कहते हैं, एक बहुत ही पौष्टिक खाद्यान है। इसे तेलुगु में ‘मोक्का जोनालु’, तमिल में ‘मक्काचोलम’, मलयालम में ‘चोलम’, कन्नड़ में ‘मुसुकिना जोला, गुजराती में ‘मक्कई’, मराठी में ‘मकई’ और बंगाली में ‘भुट्टा’ कहते हैं। मक्के का पौधा बड़ा और पत्तेदार होता है और मूल रूप से ये मेक्सिको और अमेरिका में उगने वाला पौधा है।
    • आजकल बाजारों में उबले हुए और ज्यादा रस वाले मक्का भी खाने को मिल रहे हैं। इसे हम स्वीट कार्न्स (Sweet Corns) कहते हैं। यह स्वीट कार्न्स फ्रोजन करके पैकेट्स में मदर-डेयरी बूथ्स पर भी उपलब्ध हैं। इसके भी उतने ही फायदे हैं जितने ताजे मक्का के। इन्हे भी हम अपने रोज के भोजन में उपयोग में ला सकते हैं।
    ये तो रही मक्के के बारे में थोड़ी सी जानकारी। पर जरुरी बात ये है की इसके क्या फायदे हैं। तो आईये हम एक नजर डालते है मक्के के गुणकारी विशेषताओं के बारे में।

      मक्का या भुट्टा खाने के 10 फायदे :

      1. वजन बढाने में सहायक – पतले लोगो के लिए, जो वजन बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए मक्का बेहद फायदेमंद है। मक्के में कैलोरी और कार्बोहायड्रेट होता है जो शरीर पर मांस लाता है और वजन बढ़ा देता है।
      2. पाचन के लिए लाभदायक – मक्के में पाए जाने वाले फाइबर पाचन क्रिया को मजबूत बनाते हैं। इसके सेवन से पेट के कई विकार जैसे बदहजमी, कब्ज, गैस इत्यादि दूर रहते हैं।
      3. दिल का भी रखता है ख्याल – शोध में ये पाया गया है की मक्के के तेल के सेवन से धमिनियों में जमा कोलेस्ट्रोल नष्ट होता है साथ ही मक्के के तेल में पाए जाने वाले ओमेगा-3 फैटी एसिड से ह्रदयघात का खतरा (heart problems) न के बराबर हो जाता है।
      4.  तेज करता है आँखों की रोशनी – मक्के के दाने में कैरोटिनोयाड्स (Carotenoids) नामक तत्व पाए जाते हैं। मक्के के दाने में मौजूद ये कैरोटिनोयाड्स रेटिना पे लाभकारी प्रभाव डालते हैं जिसके फलस्वरूप आँखों की रौशनी ठीक रहती है। मक्के में विटामिन ए भी पाया जाता है जो किसी भी तरह के दृष्टि दोष होने से रोकता है।
      5. एंटी कैंसर विशेषताएं – शोध में पता चला है की मक्के में पाए जाने वाले एंटीओक्सिडेंट्स कैंसर से लड़ने की क्षमता रखते हैं। मक्के में मौजूद फेरुलिक एसिड (Ferulic Acid) स्तन और लीवर के ट्यूमर्स को नष्ट करता है और स्तन कैंसर और लीवर के कैंसर के होने की संभावनाओं को काफी हद तक कम कर देता है।
      6. गर्भावस्था के दौरान भी लाभदायक – चूँकि मक्के के दाने में फोलिक एसिड पाया जाता है इसलिए ये गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत लाभदायक होता है। गर्भवती महिलाओं में अगर फोलिक एसिड की कमी हो तो जन्म लेने वाला बच्चा कमजोर और कुपोषित हो सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को तो मक्के को अपने आहार में जरुर शामिल करना चाहिए।
      7. अल्झाइमर रोग की भी करता है रोकथाम – मक्का थायमिन (Thymine) का भी एक प्रमुख स्त्रोत है। थायमिन की कमी से दिमाग में होने वाली कई क्रियाएं बाधित होती हैं जिसके फलस्वरूप कई तरह की दिमाग सम्बंधित बिमारी होने के ख़तरा होता है। अल्झाइमर का रोग भी इनमे से एक है।
      8. बालों के लिए भी उपयोगी – एक कप मक्के के रोजाना सेवन से हेयर फोलिक्ल मजबूत बनते हैं और बाल गिरने, और बालों के रूखे होने जैसी समस्याओं से निजात दिलाते हैं। मक्के मे मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट तत्व विटामिन ए और लाइकोपिन (Lycopine) बालों को सुलझा और मजबूत बनाते हैं। मक्के के रोजाना सेवन बालों की समस्याएं न के बराबर हो जाती हैं।
      9. तुरंत उर्जा देने वाल स्त्रोत – मक्के में भरपूर मात्रा में स्टार्च और कार्बोहायड्रेट मौजूद होते है जो तुरंत ऊर्जा देने के साथ साथ लम्बे समय तक आपको उर्जावान बनाने में सहायक होते हैं। एक कप मक्के में 29 ग्राम कार्बोहायड्रेट होता है।जिम इंस्ट्रक्टर और डायटीशियन, वर्कआउट करने से पहले मक्का खाने की सलाह देते हैं, क्यूंकि मक्के के सेवन से बहुत जल्दी ही देर तक काम करने की उर्जा मिलती है।
      10. एनीमिया होने से बचाता है – एनीमिया विटामिन B12 और फोलिक एसिड की कमी से होता है। मक्के में ये दोनों तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। मक्के में आयरन भी प्रचुर मात्र में होता है जो नए रेड ब्लड सेल का निर्माण करता है।

      सुबह खाली पेट जौ का पानी पीने से कमर और पेट की चर्बी मक्खन की तरह पिघल जाएगी

      जौ एक किस्म का अनाज होता है जो देखने में गेंहू की तरह लगता है। जौ गेहूं की अपेक्षा हल्का होता है। जौ में लैक्टिक एसिड, सैलिसिलिक एसिड, फॉस्फोरिक एसिड, पोटैशियम और कैल्शियम होता है। अगर आपके पेट और उसके आसपास अधिक चर्बी जमा हो गई हो तो जौ के पानी का सेवन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इसको पीने से आपकी पेट की चर्बी कम होने लगती है। इस लेख में विस्‍तार से जानिये, यह चर्बी कैसे कम करता है।
      • जौ की रोटी का इस्तेमाल अक्सर डायबिटिज मरीजो के लिए बेहतर माना जाता है। उनके शरीर के लिए यह बहुत ही फायदेमंद होता है। इस तरह की बीमारियों के अलावा और भी कई तरह की बीमारियां है जिसमे यह हमारे शरीर को बहुत फायदा करता है। और हमारे शरीर मे उन बीमारियो से लड़ने की क्षमता पैदा करता है। जौ में भरपूर मात्रा में विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, मैगनीज, सेलेनियम, जिंक, कॉपर, प्रोटीन, अमीनो एसिड, डायट्री फाइबर्स सहित कई तरह के एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। जो कि हमारी सेहत को काफी फायदा पहुंचाते है। इसका इस्तेमाल हम अनाज के रुप मे तो करते है हि साथ ही अगर इसका इस्तेमाल पानी के साथ किया जाएं तो यह हमारे शरीर मे बहुत फायदा पहुंचाता है। यह कई बीमारियों से निजात दिलाने मे हमारी सहायता करता है।

      जौ के पानी को तैयार की विधि :

      • इसके लिए आप कुछ मात्रा में जौ लगभग (100-250 ग्राम) ले लीजिए और उसे अच्छी तरह साफ कर लीजिए उसके बाद इसे करीब चार घंटे तक पानी में भिंगोकर छोड़ दीजिए। फिर इस पानी को तीन से चार कप पानी में मिलाकर धीमी आंच में कम से कम 45 मिनट तक उबाले। इसके बाद गैस बंद कर दें और इसे ठंडा होने दे। जब यह ठंडा हो जाएं तो इसे एक बोतल में भरकर इसके पानी को पीने के लिये इस्तेमाल में लेवे, ये एक दिन का प्रयोग है यही प्रक्रिया रोजाना करे लाभ होगा। मोटापे से ग्रसित लोग कृपया जंक फूड को त्याग दे।

      जौ को अनाज के रुप मे खाने के साथ-साथ इसके पानी पीने के और क्या-क्या है फायदें :

      1. मोटापा, पेट और कमर की चर्बी घटाए :
      • वजन सबंधी परेशानी मे यह बहुत ही उपयोगी होता है। इसमें ऐसे तत्व पाएं जाते है। जिसका सेवन करने से मेटाबॉलिज्म बढ़ते है। जौ मोटापे को कम करने मे उपयोगी होता है जिससे आप स्लिम नजर आ सकते है। 
      • कैसे कम करता है मोटापा : जौ घुलनशील और अघुलनशील फाइबर का स्रोत होता है। इस गुण के कारण आपको देर तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। दो लीटर पानी में दो बड़े चम्मच जौ डालकर उबालें। उबालने के वक्त ढक्कन को अच्छी तरह से लगा दें ताकि जौ के दाने अच्छी तरह से पक जायें। जब यह मिश्रण पानी के साथ घुलकर हल्के गुलाबी रंग का पारदर्शी मिश्रण बन जायें तो समझ जाना चाहिए कि यह पीने के लिए तैयार है, इसको छानकर रोज इसका सेवन करें। इसमें नींबू, शहद और नमक भी डाल सकते हैं। छिलके वाले में ज्यादा फाइबर होता है और पकाने में ज्यादा समय लगता है इसलिए बिना छिलके वाले पकाने में आसान हैं। और जौ-चने के आटे की चपाती के सेवन से भी पेट और कमर ही नहीं सारे शरीर का मोटापा कम हो जाएगा।
      2. यूरीनरी इंफेक्‍शन, डीहाइड्रेशन, शरीर के विषाक्त पदार्थ :
      • इस मिश्रण (बिंदु क्रमांक 1 में बताया गया मिश्रण) को पीने से पेट की चर्बी तो कम होगी साथ ही डीहाइड्रेशन की समस्‍या भी नहीं होगी। यह यूरीनरी इंफेक्‍शन के उपचार में भी मददगार है। यह कब्ज़ को दूर करने के साथ-साथ अमा दोष (आयुर्वेद के अनुसार पेट के विषाक्त अवांछित पदार्थ) से भी राहत दिलाता है। इस अनाज में मूत्रवर्द्धक (diuretic) गुण होता है जो विषाक्त पदार्थों के साथ शरीर के अतिरिक्त पानी को भी निकाल देता है।
      3. ह्रदय की बीमारीयो में :
      • इसमें पाया जाने वाले तत्व कोलेस्ट्राल के लेवल को ठीक रहता है। जिसके कारण आपको दिल संबंधी किसी भी तरह की बीमारी नहीं होगी। दिल की बीमारी होने का मुख्य कारण कोलेस्ट्रॉल लेवल कम होना होता है।
      4. इम्यूनिटी सिस्टम बनाए मजबूत :
      • इसमें ऐसे तत्व पाए जाते है। जो कि आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकाल देता है। जिससे कि आपका इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत हो जाता है। साथ ही आपकी स्किन में निखार भी आता है। 
      5. पेट मे जलन :
      • गर्मियों के मौसम में इसे पीने से ठंड़क मिलती है। अगर आपने तेज मसालेदार खाना खाया है जिसके कारण आपको पेट में जलन हो रही हो तो इसे दूर करने के लिए आप जौ के पानी का सेवन करे जिससे आपकी पेट की जलन मे काफी फायदा करता है।
      6. पैरों की सूजन :
      • गर्भावस्था के दौरान महिला के पैरों में होने वाली सूजन को कम करता है। और उनके पैरो की सूजन से सबंधी परेशानी को दूर करता है।
      7. यूरीन की समस्या :
      • अगर आपको यूरिन संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या है, तो जौ के पानी का सेवन करना काफी फायदेमंद साबित होता है। यह आपकी यूरीन सबंधी प्रोब्लम को दूर रखता है।

      Wednesday, 19 July 2017

      करें गीले तौलिये का प्रयोग और आसानी से कम करें पेट का फैट

      बदलता खान-पान और बदलती जीवन शैली ने आजकल अधिकतर लोगों को मोटापे का शिकार बना दिया है. आजकल अधिकतर लोग बाहर का खाना खाने के शौकीन हो रहे हैं और बाहर का खाना उनकी सेहत को बहुत नुकसान पहुंचाता है. बाहर का खाना अक्सर ही बहुत अधिक तेल व मसाले वाला होता है. इस खाने में किस तरह की सामग्री का प्रयोग किया गया है यह भी किसी को नहीं पता होता.

      मोटापे की समस्या कोई आम समस्या नहीं है और इसे ऐसे ही नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर आपका मोटापा लगातार बढ़ रहा है तो आपको तो यह आपके लिए चिंता का विषय है क्योंकि यह कई अन्य गंभीर बीमारियों की जड़ है. मधुमेह, ब्लड प्रेशर व कई दिल की समस्याओं की शुरुआत मोटापे से ही होती हैं.

      अगर आप मोटापे की समस्या से परेशान हैं तो आपके लिए यह आवश्यक है कि आप नियमित व्यायाम करें और अपने खान-पान पर नियंत्रण करें. यदि आपका मोटापा दिन पर दिन बढ़ रहा है तो आपको संतुलित और घर का बना खाना ही खाना चाहिए.

      योग, कसरत और संतुलित आहार के अतिरिक्त एक आसान सा रास्ता और है जिसका प्रयोग कर के आप अपना मोटापा कम कर सकते हैं. इस रास्ते से मोटापा कम करने के लिए आपको एक तौलिया का प्रयोग करना होगा. सबसे अच्छी बात यह है कि इस तरीके से वज़न कम करने के लिए आपको किसी तरह की मेहनत करने और पसीना बहाने की भी ज़रुरत नहीं है.

      वज़न कम करने के लिए आपको सोते समय सिर्फ एक मोटे तौलिये को साधारण पानी में भिगोकर अपने पेट पर रखकर किसी दूसरे कपड़े से बांधकर सोना है. यह गीला तौलिया आपकी पाचन शक्ति को सुधारता है और आपके शरीर में वाइट फैट सेल्स को तोड़कर ब्राउन फैट सेल्स में बदल देता है.

      हैंगोवर को उतारने के लिए आजमाएं ये आसान से तरीकें

      ड्रिंक करने वाले लोगों को पीने का बहाना चाहिए पर किसी रात अगर आपने ज्यादा पी ली तो अगली सुबह हैंगोवर किसी भी बहाने से नहीं दूर होगा।
      और यदि हैंगोवर के कारण आप ऑफिस में अपना काम ठीक से न कर पा रहे हों तो शायद आपका बॉस भी कोई बहाना न सुने।
      इसलिए अच्छा ये होगा कि ड्रिंक करने के बाद आप जो सबसे पहला काम करें वह हैंगोवर दूर करने के उपाय हो। आज हम आपको ऐसे आसान उपाय बता रहें हैं जिसे अजमाकर आप मिनटों में हैंगोवर दूर कर सकते हैं
      ज्यादा पानी पीएं:
      ड्रिंक करते समय ध्यान रखें की आप अपने कॉकटेल के बीच खूब पानी पीएं। अगर ड्रिंक्स के दौरान आप कम पानी पीए हैं और अगली सुबह हैंगोवर के साथ उठें हों तो उठते ही खूब सारा पानी पीएं।
      ताजा फल खाएं:
      ताजा कटे फल खाना हैंगोवर दूर करने का एक कारगर उपाय है। खासकर सेब और केला। केले के शेक में अगर एक चमच्च शहद मिलाकर लें तो आसानी से हैंगोवर दूर हो जाएगा।
      टोस्ट और अंडा:
      हैवी ड्रिंक के अगली सुबह अगर नास्ते में टोस्ट और अंडा लेते हैं तो हैंगोवर को कम किया जा सकता है।
      नींबू:
      नींबू के रस में हैंगओवर दूर करने के के गुण होते हैं. हैंगोवर की स्थिति में 1-1 घंटे के अंतराल में शहद के साथ नींबू पानी लेना चाहिए।
      संतरे का रस:
      ऐसे में संतरे के रस का सेवन करना एक आसान घरेलु उपाय है. यह रीहाइड्रैशन में मददगार साबित होगा और इसमें मौजूद विटामिन सी मिचली से राहत दिलाता है. आप चाहे, तो इसके साथ हल्के सिके ब्रेड या अंडे भी खा सकते हैं.
      कॉफ़ी:
      एक कप कडक कॉफी का नुस्खा, हैंगोवर से राहत दिलाने में विश्व प्रसिद्ध है. आप एक ही बारी में सारी कॉफी ना पियें, बल्कि बीच बीच में आधा आधा कप कॉफी का पीते रहें. कैफीन से हमारे शरीर का रक्तचाप बढ़ता है. और इसका सीधा असर हमारे शरीर के चयापचय पर पड़ता है. साथ ही यह आपकी सुस्ती दूर भगा कर सिर दर्द से राहत दिलाएगा
      दर्दनाशक गोलियां:
      हम अपने घर में किसी ना किसी दर्द से राहत पाने के लिए दर्दनाशक गोलियाँ रखते हैं, ये गोलियाँ शरीर में उठते दर्द और हैंगोवर में होती असुविधा में बहुत लाभदायक है. हैंगोवर से राहत पाने के लिए केवल एक गोली डिस्प्रिन या ब्रुफेन की खायें. ध्यान रखें, इसका अधिक सेवन आपके लिए हानिकारक हो सकता है.
      कसरत:
      हैंगोवर में कसरत का अर्थ यह नहीं है, कि आप बहुत ज्यादा व्यायाम करें. हो सके तो ट्रेडमिल पर धीमी गति से दौड़ना  कुछ पुश-अप करना भी काफी है. कसरत करते समय हमारे शरीर से पसीना निकलता है और अपने शरीर को रीहाइड्रैट करने के लिए किसी कम चीनी वाले ड्रिंक का सेवन करें.
      लेकिन आपको बता दें, हैंगोवर दूर करने के लिए अच्छी नींद से आसान और कारगर तरीका कुछ नहीं है। अगर आपने ज्यादा पी ली हो तो जरूर है कि आप अच्छी और लंबी नींद लें और इसके बावजूद भी यदि आप अगली सुबह हैंगोवर के साथ उठें तो ऊपर दिए गए तरीकों को अजमाएं।

      2 हफ्तों में जीरा यूं कर देगा आपको ‘फैट’ से ‘फीट’

      जीरा एक ऐसा मसाला है... जो हर भारतीय घर में पाया जाता है। अक्सर लोग सब्जी व दाल बनाने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। खाने को स्वादिष्ट व खुशबूदार बनाने के साथ-साथ आपकी हेल्थ के भी बड़े काम का है जीरा। अब आप सोच रहे होंगे कि कैसे? तो चलिए आज हम आपको बताते हैं।
      जीरा के उपयोग से आप अपना वजन भी कर कर सकते हैं। एक शोध के मुताबिक जीरा पाउडर के सेवन से शरीर में फेट कम होता है, जिसकी वजह से मोटापा कम होने लगता है। अगर आप भी लम्बे समय से अपना वजन घटाने की सोच रहे थे, लेकिन घटा नहीं  पा रहे हैं तो अब जीरा के इन छोटे-छोटे उपायों की मदद से घटाएं अपना वजन।
      जीरा-पानी का करें सेवन
      • दो बड़े चम्मच जीरा एक गिलास पानी मे भिगो कर रात भर के लिए रख दें। सुबह इसे उबाल लें और गर्म-गर्म चाय की तरह पिये। बचा हुआ जीरा भी चबा लें। इसके रोजाना सेवन से शरीर के किसी भी कोने से अनावश्यक चर्बी शरीर से बाहर निकल जाती है।
      • -5 ग्राम दही में आप 1 चम्मट जीरा को मिलाकर रोज खाए, जल्द ही असर दिखेगा।
      • -जीरा पाउडर को पानी में मिलाएं और फिर कुछ बूंदे शहद की मिलाकर पी लें।
      • -गाजर व अन्य सब्जियों को उबाल लें उसमें थोड़ा नींबू का रस और अदरक कदूकस कर करें और रात को खा कर सो जाए। कुछ ही हफ्तों में असर दिखने लगेगा।


      Tuesday, 18 July 2017

      How to Lighten Dark Skin Around Your Pubic Area

      Numerous of women suffer from dark skin around the pubic area. It is really uncomfortable and can affect our confidence and self esteem.

      That is why in this article we are going to give you several natural remedies which will help you lighten your dark skin around the pubic area.

      1.Milk
      Milk is a natural skin lightener. You should use a cotton ball to apply it on the dark skin and massage it gently for 15 minutes. Repeat this twice a day and after several weeks you will see the results.

      2.Lemon
      Lemon is rich in vitamin C which help us get rid of dead skin cells and toning our skin. Apply some lemon juice on the affected areas and rub it for few minutes. Then leave it for 20 minutes and rinse it off. Do this every day before you go to sleep.

      3.Potato
      With potato juice you can get rid of the extra melanin pigment on your skin. You need to scrub the potato on you the affected area for few minutes and let it dry. Then wash your skin with warm water.

      4.Aloe Vera
      Aloe Vera is one of the best skin lighteners. You should apply the aloe Vera gel directly on your skin and leave it stay for 20 minutes before you wash it away. Repeat this regularly and the results will be unbelievable.

      5.Orange Juice and Turmeric
      Oranges contain natural bleaching agents. You can use it to lighten your dark skin and treat different skin spots. Combine 2 tablespoons of orange juice and pinch of turmeric. Then apply it on the pubic area and leave it for 30 minutes. After that, rinse it off. Repeat this every day after waking up for a period of one month.  

      This Drink Will Cleanse Your Kidneys and Improve Their Functions


      The kidneys are vital organs in our body. They are bean-shaped, located near the middle of our back, below the rib cage. They process our blood and eliminate waste and water from our body by producing urine.

      Each kidney contains around million units called nephrons which are a filter for the blood. It is possible to lose as much as 90% of kidney function without feeling any symptom.

      Here in this article, we are going to give you a recipe for a drink which will cleanse your kidneys and improve their functions.

      Ingredients you will need:

      8 cups of water
      2 tablespoons of honey
      Juice from a half a lemon
      1 bunch of parsley leaves

      Preparation:

      Chop the parsley leaves and add them to boiling water. Let them simmer for 10 minutes. Then add the lemon juice and the honey. Stir it well and drink the remedy. You should drink it twice a day.
      Parsley is an excellent diuretic which can help us in the case of water retention and hypertension. It is also rich in vitamins and minerals essential for our kidneys. They strengthen our immune system and protect our organism.


      Here is another recipe for an amazing drink which provides numerous of benefits for your kidney.


      Ingredients you will need:

      1 cucumber
      ½ lemon
      A cluster of parsley
      1 teaspoon grounded ginger
      1/3 glass of water

      Preparation:

      Put all the ingredients in a juicer and the magic drink is ready. Keep the remedy in a fridge. Drink it every night before you go to sleep and after several days you will feel the results. It will cleanse your kidneys and protect them from different of diseases. It will also boost your immune system and improve your overall health.

      Don’t think twice prepare this remedy immediately and you will be amazed by the results.

      Homemade Juice for Burning Abdominal Fat

      There are numerous of recipes for losing extra weight and improving our health, but they not always work. Here we are going to give you the best recipe for a homemade juice which has amazing benefits for our body and one of them is burning the abdominal fat.

      It is easy for preparing and every one of us can make it in our homes.

      Ingredients you will need:

      1 unit cucumber
      3 pieces of pineapple
      A steam o celery
      A glass of parsley leaves

      Preparation:

      Cut the cucumber in circles and the celery and parsley into small pieces. Add them in a blender and blend them well till you get a homogeneous  mixture.

      Use:

      You should drink this juice every morning on an empty stomach. After a short period you will see the results. You will lose your extra pounds and also improve your health.

      Another recipe which can help you burn your abdominal fat

      Ingredients you will need for preparing the remedy:

      2 grapefruits
      1 tablespoon grated ginger
      1 tablespoon apple cider vinegar

      Preparation:

      Put the ingredients in a juicer and mix it well. Drink it 30 minutes before you go to sleep for a period of 7 days and then have a break of 7 days. Repeat this till you get the wanted results.

      If you are one of the millions of people with overweight problems you should try these juices and see the improvements. During the this period you should exercise regular minimum 30 minutes a day and also try to avoid food as: white bread, sugary drinks, candy bars, alcohol, fast food, and milk products. The results will be unbelievable. Don’t think twice make a change in your diet and get the body you always wanted.

      प्याज खाने और काटने के होते है ये फायदें

      कच्चा प्याज काटते समय अक्सर आप सभी की आंखों में आंसु आ जाते होंगे। लोग प्याज खाना तो पंसद करते लेकिन काटना पंसद नहीं करते। लेकिन क्या आप जानते है कि कच्चा प्याज काटने और खाने के बहुत से फायदें है। यदि आप सब ये सारे फायदे जान जाएंगे तो प्याज रोज खाना शूरू कर देंगे। वैसे तो प्याज काफी गुणकारी है, लेकिन पकने के बाद प्याज के पैष्टिक तत्व खत्म हो जाते है, इसलिए बेहतर होगा की आप प्याज को कच्चा ही खाए। तो आइए जानते है प्याज खाने के फायदें-


      • प्याज में सल्फर युक्त तत्वों की काफी मात्रा होती है. इस वदह से ही प्याज में तीव्र सुगंध औषधीय गुण होता है.
      • -प्याज में विटामिन सी, विटामिन बी6, बायोटिन, फोलिक एसिड, क्रोमियम और फाइबर प्रचूर मात्रा में पाया जाता है।
      • -प्याज कॉलेस्ट्रोल और ट्राइग्लेसराइड्स को कम करती है। प्याज में मौजूद सल्फर फ्राकृतिक रूप से खून को पतला करने और पलेटलेट्स के जमावड़े को रोकने के लिए जाना जाता है। वहीं प्याज में मौजूद क्यीरसटिन धमनियों को सख्त होने से बचाता है और इस तरह से हार्ट अटैक के खतरे को कम करता है।
      • -प्याज में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण श्वास नली की मांसपेशियों को रिलैक्स करके अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसे रोगो में अराम पहुंचाते हैं। प्याज खांसी, जुकाम और फिलू जैसे रोगो से भी हमारी रक्षा करती है।
      इसे भी पढ़ें-हैंगोवर को उतारने के लिए आजमाएं ये आसान से तरीकें

      • प्याज में मौजूद एंटीमाइक्रोबियल गुण हमें किटाणुओं से पैदा होने वाली खाद्य जनित रोगों से भी बचाते हैं।
      • -प्याज टीबी के लए जिम्मेदार बैक्टेरिया इकोबैकटेरियम को निष्क्रिय कर सकती है।
      • -स्तनपान करवा रहीं मां यदि कच्चा प्याज खाएं तो उनके स्तनों में दूध का उत्पादन बढ़ जाता है।
      • -कच्चे प्याज में एंटी ऑक्सीडेंट भी होते हैं।
      • -प्याज में एंटी कैंसर गुण भी पाए जाते हैं।
      • -कच्चा प्याज खाने से पाचन तंत्र संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।
      • -प्याज में प्रचूर मात्रा में लोहा पाया जाता है। अगर एक कच्चा प्याज रोज खाया जाए तो अनेमिया की समस्या दूर हो जाती है।
      • -प्याज रक्त में शुगर की मात्र को नियंत्रित करती है।

      Thursday, 25 May 2017

      एक्ज़िमा और सोराइसिस के लिए रामबाण उपाय। (Panacea remedy for eczema and psoriasis)

      कई ऐसे त्वचा रोग हैं, जो लंबे समय तक रोगी को परेशान करते हैं. कई बार लंबे समय तक इलाज के बावजूद ये ठीक नहीं होते हैं. ऐसे में रोगी निराश भी हो जाते हैं. सोरायसिस एक ऐसा ही रोग है, जो आॅटो इम्यून डिसआॅर्डर है. अगर सही तरीके से धैर्य रख कर इलाज कराया जाये, तो इस रोग से भी छुटकारा पाया जा सकता है. 
       
      सोरायसिस क्रॉनिक यानी बार बार होनेवाला आॅटोइम्यून डिजीज है, जो शरीर के अनेक अंगो को प्रभावित करता है. यह मुख्य रूप से त्वचा पर दिखाई देता है, इसलिए इसे चर्म रोग ही समझा जाता है. यह किसी भी उम्र में हो सकता है. एक आंकड़े के मुताबिक दुनिया भर में लगभग एक प्रतिशत लोग इस रोग से पीड़ित हैं. यह रोग किसी भी उम्र में शुरू हो सकता है पर अकसर 20-30 वर्ष की आयु में अधिक आरंभ होता है. 60 वर्ष की आयु के बाद इसके होने की आशंका अत्यंत कम होती है. 5-10 प्रतिशत रोगियों में माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्य को भी इस रोग से पीड़ित देखा गया है. आयुर्वेद में सोरायसिस को एक कुष्ठ, मंडल कुष्ठ या किटिभ कुष्ठ जैसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है. बोलचाल की भाषा में कुछ लोग इसे छाल रोग भी कहते हैं.
       
      क्या हैं कारण 
       
      शरीर के इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक प्रणाली की गड़बड़ी को इसका कारण माना जाता है. आयुर्वेद में विरुद्ध आहार या असंतुलित खान-पान के कारण पित्त और कफ दोषों में होनेवाली विकृति को इसका कारण बताया गया है. त्वचा की सबसे बाहरी परत (एपिडर्मिस) की अरबों कोशिकाएं प्रतिदिन झड़ कर नयी कोशिकाएं बनती हैं और एक महीने में पूरी नयी त्वचा का निर्माण हो जाता है. सोरायसिस में कोशिकाओं का निर्माण असामान्य रूप से तेज हो जाता है और नयी कोशिकाएं एक माह की जगह चार-पांच दिनों में बन कर मोटी चमकीली परत के रूप में दिखाई पड़ती हैं और आसानी से झड़ने लगती है. चोट लगने, संक्रामक रोग के बाद या अन्य दवाओं के कुप्रभाव के कारण भी सोरायसिस की शुरुआत होती है.
       
      इस रोग के लक्षण 
       
      सोरायसिस कोहनी, घुटनों, खोपड़ी, पीठ, पेट, हाथ, पांव की त्वचा पर अधिक होता है. शुरुआत में त्वचा पर रूखापन आ जाता है, लालिमा लिये छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं. ये दाने मिल कर छोटे या फिर काफी बड़े चकत्तों का रूप ले लेते है. चकत्तों की त्वचा मोटी हो जाती है. 
       
      हल्की या तेज खुजली होती है. खुजलाने से त्वचा से चमकीली पतली परत निकलती है. परत निकलने के बाद नीचे की त्वचा लाल दिखाई पड़ती है और खून की छोटी बूंदे दिखाई पड़ सकती हैं. खोपड़ी की त्वचा प्रभावित होने पर यह कभी रूसी की तरह या अत्यधिक मोटी परत के रूप में दिखाई पड़ती है. नाखूनों के प्रभावित होने पर उनमें छोटे-छोटे गड्ढे हो सकते हैं. विकृत हो कर मोटे या टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं. नाखून पूरी तरह नष्ट भी हो सकते हैं. 
       
      लगभग 20% सोरायसिस के पुराने रोगियों के जोड़ों में दर्द और सूजन भी हो जाती है, जिसे सोरायटिक आर्थराइटिस के नाम से जाना जाता है. अधिकांश रोगियों में रोग के लक्षण ठंड के समय में बढ़ जाते हैं. पर कुछ रोगियों को गरमी के महीने में अधिक परेशानी होती है. तनाव, शराब के सेवन या धूम्रपान से भी लक्षण बढ़ जाते हैं. अधिक प्रोटीन युक्त भोजन जैसे-मांस, सोयाबीन, दालों के सेवन से भी रोग के लक्षणों में वृद्धि हो सकती है. यह छूत की बीमारी नहीं है.
       
      जिद्दी त्वचा रोग है सोरायसिस
       
      सोरायसिस एक आॅटो इम्यून डिजीज है, जिसमें त्वचा पर चकत्ते पड़ जाते हैं और उनमें खुजली होती है. यह रोग काफी जिद्दी है और लंबे समय तक परेशान करता है. अगर धैर्य रख कर इसका उपचार सही तरीके से कराया जाये, तो इससे छुटकारा मिल सकता है. आयुर्वेद से इसके ठीक होने की संभावना अधिक होती है.
       
      रोग के अनेक प्रकार
       
      प्लाक सोरायसिस : लगभग 70-80 % रोगी प्लाक सोरायसिस से ही ग्रस्त होते हैं. इसमें कोहनियों, घुटनों, पीठ, कमर, पेट और खोपड़ी की त्वचा पर रक्तिम, छिलकेदार मोटे धब्बे या चकत्ते निकल आते हैं. इनका आकार दो-चार मिमी से लेकर कुछ सेमी तक हो सकता है.
       
      गट्टेट सोरायसिस : यह अकसर कम उम्र के बच्चों के हाथ पांव, गले, पेट या पीठ पर छोटे -छोटे लाल दानों के रूप में दिखाई पड़ता है. प्रभावित त्वचा प्लाक सोरायसिस की तरह मोटी परतदार नहीं होती है. अनेक रोगी स्वत: या इलाज से चार-छह हफ्तों में ठीक हो जाते हैं. पर कभी-कभी ये प्लाक सोरायसिस में परिवर्तित हो सकते हैं
       
      पामोप्लांटर सोरायसिस : यह मुख्य रूप से हथेलियों और तलवों को प्रभावित करता है. 
      पुस्चुलर सोरायसिस: इस प्रकार में अकसर हथेलियों, तलवों या कभी-कभी पूरे शरीर में लालिमा से घिरे दानों में मवाद हो जाता है. 
      एरिथ्रोडार्मिक सोरायसिस : इस प्रकार के सोरायसिस में चेहरे समेत शरीर की 80 प्रतिशत से अधिक त्वचा पर जलन के साथ लालिमा लिये चकत्ते हो जाते हैं. शरीर का तापमान असामान्य हो जाता है, हृदय गति बढ़ जाती है और समय पर उचित चिकित्सा नहीं होने पर रोगी के प्राण जा सकते हैं. 
       
      इन्वर्स सोरायसिस : इसमे स्तनों के नीचे, बगल, कांख या जांघों के उपरी हिस्से में लाल बड़े-बड़े चकते बन जाते हैं.
      होमियोपैथी में उपचार
       
      सोरायसिस इम्युनिटी में गड़बड़ी के कारण होता है, इसलिए इसका उपचार करने का सबसे अच्छा तरीका इम्युनिटी में सुधार करना ही है. अत: इम्युनिटी को सुधारने के लिए सोरिनम सीएम शक्ति की दवा चार बूंद महीने में एक बार लें. 
      काली आर्च : अगर त्वचा से रूसी निकले, नोचने पर और अधिक निकले, रोग जोड़ों पर अधिक हो, तो काली आर्च 200 शक्ति की दवा चार बूंद रोज सुबह में दें.
       
      पामर या प्लांटर सोरायसिस : अगर सोरायसिस हथेली या तलवों तक ही सीमित हो, तो इसके लिए सबसे अच्छी दवा फॉस्फोरस है. इसकी 200 शक्ति की दवा चार बूंद सप्ताह में एक बार लें.
       
      काली सल्फ : सोरायसिस सिर में भी होता है. सिर की त्वचा से सफेद रंग की रूसी निकले और गोल-गोल चकत्ते जैसे हों, तो काली सल्फ 200 शक्ति की दवा चार बूंद सप्ताह में एक बार लें.
      रोग को ठीक होने में लंबा समय लग सकता है. अत: धैर्य रख कर उपचार कराना जरूरी है.
      (होमियोपैथी विशेषज्ञ डॉ एस चंद्रा से बातचीत)
       
      सोरायसिस की चिकित्सा 
       
      यह एक हठीला रोग है, जो अकसर पूरी तरह से ठीक नहीं होता है. यदि एक बार हो गया, तो जीवन भर चल सकता है. अर्थात् रोग होता है, फिर ठीक भी होता है, लेकिन बाद में फिर हो जाता है. कुछ रोगियों में यह लगातार भी रह सकता है. हालांकि इसके कुछ रोगी अपने आप ठीक भी हो जाते हैं. 
       
      क्यों ठीक होते हैं अभी तक कारण अज्ञात है. कुछ नये रोगी धैर्य से खान-पान परहेज के साथ जीवनशैली में आवश्यक परिवर्तन और सावधानियों के साथ दवाओं से पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं अथवा रोग के लक्षणों से लंबी अवधि के लिए मुक्ति मिल जाती है. रोग के प्रारंभ में ही यदि आयुर्वेद विज्ञान से उपचार कराया जाता है, तो उपचार से रोग के ठीक होने की अधिक संभावना है. पुराने रोगियों को भी तुलनात्मक दृष्टि से कम खर्च में काफी राहत मिल जाती है. और रोगी बगैर परेशानी के सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है. एलोपैथ चिकित्सा प्रणाली में कुछ वर्षों पहले तक इसकी संतोषजनक चिकित्सा नहीं थी. विगत एक दशक में कई प्रभावकारी दवाएं विकसित हुई हैं, जिनके प्रयोग से लंबे समय तक रोग के लक्षणों से राहत मिल जाती है. 
       
      एलोपैथ चिकित्सा 
       
      साधारणतया सोरायसिस के लक्षण मॉश्च्यूराइजर्स या इमॉलिएंट्स जैसे-वैसलीन, ग्लिसरीन या अन्य क्रीम्स से भी नियंत्रित हो सकते हैं. यदि यह सिर पर होता है, तो विशेष प्रकार के टार शैंपू काम में लाये जाते हैं. मॉश्च्यूराइजर्स या अन्य क्रीम सिर और प्रभावित त्वचा को मुलायम रखते हैं. सिर के लिए सैलिसाइलिक एसिड लोशन और शरीर पर हो, तो सैलिसाइलिक एसिड क्रीम विशेष उपयोगी होती है. इसके अलावा कोलटार (क्रीम, लोशन, शैंपू) आदि दवाइयां उपयोगी होती हैं. 
       
      पुवा (पीयूवीए) थेरेपी : अल्ट्रावायलेट प्रकाश किरणों के साथ सोरलेन के प्रयोग से भी आंशिक  रूप से लाभ मिलता है पर रोग ठीक नहीं होता.
       
      बीमारी ज्यादा गंभीर हो, तब मीथोट्रीक्सेट और साइक्लोस्पोरिन नामक दवाओं से सामयिक और आंशिक लाभ होता है, पर हानिकारक प्रभावों के कारण लंबे समय तक इनके प्रयोग में अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता है.
       
      इसके अलावा कैल्सिट्रायोल और कैल्सिपौट्रियोल नामक औषधियों का भी बहुत अच्छा प्रभाव होता है. पर ये महंगी होने के कारण सामान्य आदमी की पहुंच से बाहर होती हैं. 
       
      सेकुकीनुमाब नाम की बयोलॉजिकल मेडिसिन से बेहतर परिणाम मिले हैं. इस दवा से काफी लाभ होता है. पर इसका खर्च प्रतिवर्ष लाखों में होने के बावजूद रोग से पूरी तरह छुटकारे की गारंटी नहीं है. ये सब दवाएं किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की देखरेख में ही लेनी चाहिए. रोग के लक्षणों को दूर होने में लंबा समय लग सकता है. इस कारण रोगी को धैर्य रख कर इलाज कराना चाहिए. बीच में इलाज छोड़ने से समस्या और बढ़ सकती है और समस्या दूर होने में भी परेशानी हो सकता है.                            
       
       
      रोग होने पर क्या करें  
       
      विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह लें. एलोपैथ के साथ-साथ इस रोग में लाभकारी खानपान, जीवनशैली, आयुर्वेद तथा वनौषधियों के प्रयोग से इसमें लाभ मिलता है. नीम-हकीमों के और गारंटी से ठीक कर देनेवालों के चक्कर में अकसर धन और समय की हानि के साथ-साथ रोग की जटिलताएं बढ़ जाती हैं.
       
      क्या है आॅटोइम्यून डिजीज
       
      आहार, विहार तथा जीवनशैली में गड़बड़ी के साथ-साथ निरंतर बढ़ते कृत्रिम रसायनों के उपयोग, प्रदूषण जैसे ज्ञात तथा अनेक अज्ञात कारणों से शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति (इम्युनिटी) अपने ही शरीर के अंगो को हानि पंहुचाने लगती है और विभिन्न रोगों का कारण बनती है. इसे आप इस तरह समझ सकते हैं कि यदि पुलिस या सेना में विद्रोह हो जाये, तो वे नागरिक, समाज और देश की सुरक्षा के बजाय अपने ही नागरिकों और व्यवस्था के प्रति हिंसक हो जाते हैं. ठीक ऐसी ही घटना शरीर में भी होती है. इसी के कारण कोशिकाओं में तीव्र गति से वृद्धि होने लगती है.
       
      कुछ आॅटोइम्यून बीमारियां : रुमेटॉयड आर्थराइटिस, सोरायसिस, हासिमोटो, थायरॉयड, ल्यूपस एरिदोमेटेसिस, स्क्लेरोडर्मा, अल्सरेटिव कोलाइटिस, क्रोह्नस डिजीज, विटिलिगो, एलोपेसिया एयार्टा आदि अनेक रोग इस श्रेणी में आते हैं. 
       
      आयुर्वेद स्वास्थ्य विज्ञान में सोरायसिस की चिकित्सा के लिए अनेक औषधियों के विकल्प के साथ-साथ आहार-विहार, परहेज का विशेष ध्यान रखा जाता है. कभी-कभी शरीर में व्याप्त हानिकारक तत्वों को निकालने के लिए पंचकर्म नामक विशिष्ट चिकित्सा का प्रयोग काफी लाभ दायक होता है. उपयोगी जड़ी-बूटियां तथा आयुर्वेदिक दवाएं जैसे-घृतकुमारी, श्वेत कुटज, अमृता (गुडिच), नीम, करंज, मजीठ, सारिवा, खदिर, मंडुकपर्णी, कुटकी, नीम, हल्दी, कैशोर गुगलू, रस माणिक्य, महामंजिष्ठादी, पंचतिक्त घृत  
      प्रतिदिन 20-30 ग्राम तीसी (अलसी)  के सेवन के साथ इसके स्थानीय लेप से कई रोगियों को 70-80 प्रतिशत लाभ होने के अनुभव आये हैं.
       
      विज्ञान सम्मत तथा परीक्षित उपयोगी घरेलू चिकित्सा
       
      • -नीम की पत्तियां या गुडिच के तने को पीस कर या उबाल कर सोरायसिस से प्रभावित अंग धोएं.
      • -घृतकुमारी (एलोवेरा) का ताजा गूदा त्वचा पर लगाएं या इस गूदे का प्रतिदिन दो-तीन चम्मच दिन में दो बार सेवन करें.
      • -प्रतिदिन 20-30 ग्राम तीसी (अलसी) का सेवन करने से भी लाभ होता है.
      • -मांस, मुर्गा, अंडा, उड़द, मटर, सोयाबीन जैसे अधिक प्रोटीन युक्त भोजन न करें. 
      • -कपालभाति और अनुलोम-विलोम का नियमित अभ्यास भी रोग से राहत देने में उपयोगी है.
      एक्ज़िमा, सोराइसिस, त्वचा रोग, आॅटो इम्यून डिसआॅर्डर, 
      प्लाक सोरायसिस, गट्टेट सोरायसिस, पामोप्लांटर सोरायसिस, इन्वर्स सोरायसिस, प्लांटर सोरायसिस, काली सल्फ
      ekzima, soraisis, tvacha rog, aaaito imyoon disaaaairdar, 
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